जब YES BANK की शुरुआत की गई तो अशोक कपूर बैंक के चेयरमैन और राणा कपूर को एमडी बनाया गया।

यस बैंक सुर्खियों में है, आपने इसके अर्श से फर्श तक आने की कई कहानियां पढी होगी, लेकिन आज हम आपको ये बताने जा रहे हैं कि कैसे बैंक के फाउंडर राणा कपूर ने अपने दोस्त को धोखा दिया, ये कहानी पूरी तरह से फिल्मी है, जहां साथ काम करने वाले पहले दोस्त बनते हैं, फिर ये दोस्ती रिश्तेदारी में बदल जाती है, दोस्त के मौत के बाद इस कहानी में दिलचस्प मोड़ आता है, जिसके बाद धोखाबाजी और तकरार देखने को मिलता है।

ऐसे हुई दोस्ती की शुरुआत
दरअसल दो कपूर की लड़ाई की शुरुआत साल 2008 के बाद शुरु हुई, उससे पहले ये समझना जरुरी है कि आखिर यस बैंक की शुरुआत कैसे हुआ, ये बात साल 1999 की है, अशोक कपूर (एबीएन एम्रो बैंक के पूर्व कंट्री हेड) हरकीरत सिंह (पूर्व कंट्री हेड Deutche Bank) और राणा कपूर (पूर्व प्रमुख कॉरपोरेट और फाइनेंस ANZ Grindlays Bank) ने रोबोबैंक के साथ मिलकर नॉन बैकिंग चलाने का लाइसेंस लिया। फिर साल 2004 में यस बैंक की शुरुआत की गई।

राणा कपूर एमडी
जब बैंक की शुरुआत की गई तो अशोक कपूर बैंक के चेयरमैन और राणा कपूर को एमडी बनाया गया, बैंक ने कस्टमर को सेविंग अकाउंट पर 6 फीसदी ब्याज देना शुरु किया, लिहाजा कुछ ही सालों में बैंक के पास लाखों कस्टमर पहुंच गये, बैंक बड़े कंपनियों को ऊंचे दर पर लोन देने लगी।

दोस्त से बने रिश्तेदार
इसी दौरान अशोक कपूर और राणा कपूर की दोस्ती रिश्तेदारी में बदल गई, अशोक की पत्नी मधु की बहन से राणा कपूर ने शादी कर ली, अब दोनों दोस्त साढू बन गये, अशोक कपूर के दो बच्चे हैं, बेटी शगुन और बेटा गौरव, जबकि राणा कपूर की तीन बेटियां है, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, बैंक तेजी से तरक्की कर रहा था, लेकिन फिर साल 2008 में मुंबई में हुए 26/11 हमले ने पूरी कहानी बदल दी, अशोक कपूर की आतंकी हमले में मौत हो गई, तब वो ट्राइडेंट होटल में ठहरे थे।

मौत के बाद दुश्मनी
अशोक कपूर की मौत के बाद उनकी पत्नी ने अपनी बेटी को बैंक में डायरेक्टर बनाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन बैंक ने ये कहते हुए उनकी दावेदारी को खारिज कर दिया कि आरबीआई के गाइडलाइंस को वो पूरा नहीं कर रही, जिसके बाद मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा, साल 2015 में फैसला अशोक कपूर के हक में सुनाया गया, इससे पहले 2012 में राणा कपूर ने अपने बैंक का इतिहास छपवाया, जिसमें अशोक कपूर का कहीं कोई जिक्र नहीं था, अशोक के परिवार ने इसे धोखा करार दिया, फिर दोनों परिवारों में तल्खी बढते चली गई।

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