जिंदगी की जंग हार गई उन्नाव पीड़िता, कोर्ट जाते समय जिंदा जला दी गई थी, होश आने पर कही थी ये बात

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अस्पताल के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. शलभ कुमार ने कहा कि हमने भरपूर कोशिश की, हमारी कोशिशों के बावजूद पीड़िता को बचाया नहीं जा सका।

उन्नाव बलात्कार पीड़िता आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई, बीती रात 11.40 में दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में उन्होने आखिरी सांस ली, इस बात की जानकारी पीड़िता की बहन ने दी, इसके बाद अस्पताल के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. शलभ कुमार ने पीड़िता ने निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि रात करीब 11.40 बडे पीड़िता को दिल का दौरा पड़ा, तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया, जिसके बाद उनकी सांसें रुक गई।

बचाने की भरपूर कोशिश की
अस्पताल के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. शलभ कुमार ने कहा कि हमने भरपूर कोशिश की, हमारी कोशिशों के बावजूद पीड़िता को बचाया नहीं जा सका, शाम को ही पीड़िता की हालत बिगड़ने लगी थी, रात 11.40 बजे उसे दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनके दिल की धड़कनें रुक गई।

मुझे जलाने वालों को छोड़ना मत
90 फीसदी से ज्यादा झुलसने के बाद भी पीड़िता ने हिम्मत नहीं हारी, गुरुवार रात 9 बजे पीड़िता को होश आया था, जिसके बाद उन्होने कहा था कि मुझे जलाने वालों को छोड़ना मत, फिर वो नींद में चली गई, डॉक्टर लगातार कोशिश कर रहे थे, उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखा गया, लेकिन फिर वो नींद से नहीं उठी, और फिर दुनिया ही छोड़कर चली गई।

बचने के चांस कम थे
सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि पीड़िता ज्यादा झुलस चुकी थी, उनके बचने के चांसेज बेहद कम थे, उनकी बिगड़ती हालत को देखकर उन्हें वेटिंलेटर पर रखा गया था, कहा जा रहा था कि कमर के नीचे के दो अंदरुनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, डॉक्टरों को सबसे ज्यादा डर संक्रमण फैलने का था, उनका डर भी सही साबित हुआ, पीड़िता के शरीर में संक्रमण फैल गया, जिसके बाद उन्हें नहीं बचाया जा सका।

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