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हरियाणा रोहतक के रहने वाले शिव दर्शन मलिक पिछले 5 सालों से गोबर से सीमेंट, पेंट और ईंट बनाकर लोगों को इनका इस्तेमाल करने के लिये प्रेरित कर रहे हैं।

घर बनाने के लिये सीमेंट, ईंट और पेंट जैसी चीजों की आवश्यकता होती है, भले ही घर बनाने के लिये इन सामानों का उपयोग करना हमारी मजबूरी बन गई हो, लेकिन कहीं ना कहीं इससे प्रकृति को नुकसान भी पहुंचता है, सोचिये कि अगर हमारे घर इन आम ईटों, सीमेंट या पेंट से ना बनकर गोबर से तैयार की हुई चीजें हो तो, क्या आपको लगता है कि ऐसा नहीं हो सकता, तो आइये आपको शिव दर्शन मलिक के बारे में बताते हैं।

कौन हैं शिव दर्शन मलिक
हरियाणा रोहतक के रहने वाले शिव दर्शन मलिक पिछले 5 सालों से गोबर से सीमेंट, पेंट और ईंट बनाकर लोगों को इनका इस्तेमाल करने के लिये प्रेरित कर रहे हैं, गांव ही नहीं बल्कि शहरी लोग भी शिव दर्शन की इस खोज का इस्तेमाल करते हुए इको फ्रेंडली घरों का निर्माण करवा रहे हैं, शिव दर्शन 100 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दे चुके हैं, ऑनलाइन या ऑफलाइन अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हुए इस काम से 50 से 60 लाख रुपये टर्नओवर प्राप्त कर रहे हैं।

पढाई-लिखाई
किसान के बेटे शिव दर्शन ने गांव के ही स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की, इसके बाद उन्होने रोहतक से ग्रेजुएशन, मास्टर्स, फिर पीएचडी की डिग्री हासिल की, कुछ सालों तक वो कॉलेज में पढाते रहे, फिर नौकरी छोड़ दी, नौकरी छोड़ने के बाद गांव की मिट्टी से जुड़े शिव दर्शन ने तय किया, कि वो कुछ ऐसा करेंगे, जिससे गांव के लोगों को आर्थिक रुप से मजबूती मिल सके, इन्हें रोजगार के लिये कहीं बाहर ना जाना पड़े, यही सोच के इन्होने इस बारे में जानकारी हासिल करनी शुरु की। शिव दर्शन आईआईटी दिल्ली के एक प्रोजेक्ट वेस्ट टू हेल्थ से साथ जुड़े, इनके साथ कुछ साल काम करने के बाद 2004 में वर्ल्ड बैंक तथा 2005 में यूएनडीपी के एक प्रोजेक्ट के साथ रिन्युएबल एनर्जी को लेकर काम करने लगे, यहां काम करते हुए इन्हें अमेरिका और इंग्लैंड जाने का मौका मिला, यहां इनकी सोच को मजबूती मिली, जब उन्होने देखा कि विदेश के पढे-लिखे और अमीर लोग भी सीमेंट और कंक्रीट से बने घरों में रहने की बजाय इको फ्रेंडली घरों में रहना पसंद करते हैं, इन घरों की खासियत ये होती है कि सर्दियों में अंदर से गर्म रहते हैं, यहां के लोग इसे भांग की पत्तियों को चूने के साथ मिलाकर घर तैयार करते थे, शिव दर्शन को ये तरीका पसंद आया, देश लौटकर वेस्ट मेटेरियल के साथ कुछ नया प्रयोग करने का सोचा, भारत वापस लौटने के बाद शिव दर्शन ने इस काम के लिये रिसर्च करनी शुरु कर दी।

गोबर से सीमेंट तैयार
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार शिव दर्शन का कहना है कि उन्होने बचपन से ही गांवों में घरों में गोबर की पुताई होते देखी है, इससे ना तो गर्मी में ज्यादा गर्मी महसूस होती है, ना ठंड में ज्यादा ठंड, क्योंकि गोबर थर्मल इंसुलेटेड होता है, यही सब देखकर शिव दर्शन ने गाय के गोबर से सीमेंट और पेंट तैयार करने का सोचा, 2015-16 में उन्होने प्रोफेशनल लेवल पर ये काम शुरु किया, गोबर से सीमेंट तैयार करने के बाद सबसे पहले इसका इस्तेमाल खुद किया, फिर गांव के लोगों को भी उपयोग के लिये दिया, सबको ये प्रयोग पसंद आया, ये देखकर शिव दर्शन ने काम को आगे बढाया, गोबर से सीमेंट बनाने के बाद इस विषय पर रिसर्च को जारी रखा, 2019 में गोबर से पेंट और ईंट भी तैयार करना शुरु कर दिया, ये प्रयोग भी लोगों को पसंद आया, जिसके बाद जल्द ही लोग उनसे जुड़ने लगे। शिव दर्शन आज की तारीख में हर साल 5 हजार टन सीमेंट की मार्केटिंग करने के अलावा पेंट और ईंट की भी अच्छी-खासी बिक्री कर लेते हैं, सिर्फ अपने राज्य में ही नहीं बल्कि उनका ये प्रोडक्ट बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान और हिमाचल समेत देश के कई राज्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्होने बताया कि वो अपने इस काम से सालाना 50 से 60 लाख रुपये का टर्नओवर प्राप्त कर रहे हैं।

पर्यावरण बचाने की कोशिश
शिव दर्शन मलिक ने कहा कि इसकी सबसे खास बात ये है कि ये पूरी तरह से इको फ्रेंडली होता है, जिससे कि पर्यावरण बचाने में मदद मिलती है, उनका कहना है कि वो गाय के गोबर से जिप्सम, ग्वारगम, चिकनी मिट्टी और नींबू पाउडर का इस्तेमाल करके ये इको फ्रेंडली सीमेंट तैयार करते हैं, इसे इन्होने वैदिक प्लास्टर का नाम दिया है। शिव दर्शन ने बीकानेर में इसकी फैक्ट्री लगाई है, इनके सभी प्रोडक्ट मान्यता प्राप्त लैब से सर्टिफाइड हैं।

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