4 बहनों में सबसे छोटी रुबी ने अंग्रेजी से दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए किया, यूपीएससी की परीक्षा भी दी, लेकिन सफलता नहीं मिली।

उसका घर बार-बार उजाड़ा जा रहा था, एक बार नहीं 16 बार उजाड़ा, सिर से पिता का साया उठ चुका था, हालांकि इसके बावजूद उसके हौसले नहीं टूटे, अपने सपनों को साकार करने के लिये वो जिस राह पर निकली थी, मंजिल तक पहुंच ही गई, पानीपत के एक सामान्य मुस्लिम परिवार की लड़की रुबी आखिरकार जज बन गई है, उसकी कहानी दूसरे युवाओं के लिये प्रेरणास्त्रोत हो सकती है, आइये आपको बताते हैं कि कैसे मुश्किलों का सामना कर ये लड़की झारखंड में जज बन गई।

झुग्गी में रहता था परिवार
पानीपत के जीटी रोड पर अनाजमंडी के पास कुछ झुग्गी हैं, जिसमें से एक झुग्गी में रूबी का परिवार भी रहता था, उनका परिवार उपयोग हो चुके कपड़ों में से कुछ कपड़े चुनते हैं और उनसे धागा बनाने का काम करता है, वेस्ट कारोबार में मजदूरी करने वाले परिवार की लड़की रुबी बड़ा अधिकारी बनना चाहती थी।

डीयू से एमए किया
4 बहनों में सबसे छोटी रुबी ने अंग्रेजी से दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए किया, यूपीएससी की परीक्षा भी दी, लेकिन सफलता नहीं मिली, इसी बीच पानीपत प्रशासन ने झुग्गी हटाने के लिये अभियान चलाया, जिसमें बार-बार उनकी झुग्गी टूटी, सड़क पर रात गुजारने की नौबत आ गई, लेकिन इन मुश्किलों के बावजूद रुबी का हौसला नहीं टूटा, डीयू से 2016 में एलएलबी की, फिर 2018 में यूपी और हरियाणा न्यायिक सेवा की परीक्षा में बैठी, लेकिन सफलता अभी दूर थी, और मुश्किलें उतनी ही पास, क्योंकि गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा था।

फुटपाथ पर बैठकर पढाई
27 अप्रैल 2019 को उनकी झुग्गी में आग लग गई, एक महीने बाद 27 मई को झारखंड न्यायिक सेवा की परीक्षा थी, ऐसे में उन्होने फुटपाथ पर बैठकर पढना शुरु किया, पीटी और मेंस पास करने के बाद 10 जनवरी 2020 को इंटरव्यू के लिये बुलाया गया, तब इंटरव्यू देकर लौटी, तो मन में सफलता की आस बंध गई, जब परिणाम आया, तो उसमें उन्हें 52वां रैंक मिला, सुबह जब सोकर उठी, तो कईयों ने उन्हें ये खुशखबरी सुनाई, जिसे सुनकर उनकी आंखें खुशी से गीली हो गई।

आजीविका बड़ी चुनौती
दैनिक जागरण से बात करते हुए रुबी ने कहा कि दो समय की रोटी का इंतजाम नहीं कर पाना जीवन की सबसे बड़ी बाधा है, पिता का साल 2004 में असामयिक निधन हो गया था, जिसके बाद मां जाहिदा बेगम ने अकेले ही 5 बच्चों को संभाला, मां ने तंगी झेलकर किसी तरह बच्चों को बड़ा किया, रुबी ने कहा कि भाई मोहम्मद रफी ने हर मोड़ पर साथ दिया और हौसला बढाया।

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