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बकरियां चराने वाले ने पहले ही प्रयास में पास किया UPSC परीक्षा, नौकरी छोड़ बने DSP

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kishore Kumar

आईएएस या आईपीएस बनने का ख्वाब लेकर दिल्ली आये किशोर ने पहले ही प्रयास में 419वां रैंक हासिल किया, आईएएस या आईपीएस तो नहीं लेकिन एसएसबी में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चयन हुआ।

ये कहानी है बुलंद हौसलों की, कभी ना हार मानने की, छोटे से गांव से बड़ी कामयाबी हासिल करने की, बेइंतहा मुफलिसी में जीने तथा मजदूर से अधिकारी बनने की, गांवों में बच्चे-बच्चे को प्रेरित करने वाली ये स्टोरी है किशोर कुमार रजक की, जिन्होने अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर ना सिर्फ सफलता हासिल की, बल्कि दूसरों के लिये भी मिसाल बने, किशोर कभी बकरियां चराया करते थे, ईंट भट्टों पर मजदूरी करते थे, कॉलेज में फेल तक हो गये, लेकिन मेहनत करने में कसर नहीं छोड़ी, फिर पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर की।

कौन है किशोर कुमार रजक
किशोर कुमार रजक झारखंड के बोकारो जिले में चंदनकेर विधानसभा क्षेत्र के गांव बुड्ढीबिनोर के रहने वाले हैं, धनबाद के कोयला खदान में मजदूर दुर्योधन तथा गृहिणी रेणुका देवी के घर साल 1986 में पैदा हुए किशोर 4 भाई तथा एक बहन में सबसे छोटे हैं, वर्तमान में रांची से तीस किमी दूर खूंटी जिले में बतौर झारखंड पुलिस डीएसपी कार्यरत हैं, किशोर कुमार रजक ने बताया कि बचपन बेहद गरीबी में बीता, घर में बिजली नहीं थी, दीया और लालटेन की रोशनी में पढाई की, गांव के खेतों में धान रोपने के बाद पशुओं के चरने के लिये जगह नहीं बचती थी, तो किशोर अपने दोस्तों के साथ तीन-चार किमी दूर घने जंगलों में बकरियां और बैल चराने जाया करते थे, ये सिलसिला खेत खाली होने तक जारी रहता था।

मजदूरी वाले दिन भी याद
किशोर कुमार रजक बताते हैं कि बकरियां चराने के साथ-साथ ईंट-भट्टों पर मजदूरी करने वाले वो दिन कभी नहीं भूल सकता, चाचा के साथ मजदूरी करने जाता था, मुझे आज भी याद है उस समय भट्टे पर एक हजार ईंट निकालने के 4 रुपये, रोड पर ईंट भरने के 12 रुपये मिला करते थे, तब कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन अधिकारी बनूंगा, लेकिन टीचर की सीख ने जिंदगी बदल दी, टीचर ने कहा था कि मजदूरी करोगे तो मजदूर बनोगे, पढोगे-लिखोगे, तो अधिकारी बनोगे। किशोर ने शुरुआती पढाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की, स्कूल के बाद 2004 में इग्नू से इतिहास विषय में स्नातक के लिये एडमिशन लिया, 2007 में एक सेमेस्टर में फेल हो गये, तो हौसला टूटा, लेकिन फिर मेहनत की, 2008 में स्नातक की डिग्री हासिल की।

दिल्ली आने चाहते थे
किशोर यूपीएससी की तैयारी के लिये दिल्ली आना चाहते थे, लेकिन आर्थिक तंग राह रोक रही थी, जान-पहचान वालों ने उधार पैसे तक नहीं दिये, फिर बड़ी बहन पुष्पा ने गुल्लक तोड़ा, जिसमें से 4 हजार रुपये निकले, उन पैसों से किशोर दिल्ली पहुंचे और यूपीएससी की तैयारियों में जुट गये। वो दिल्ली में अपना खर्च निकालने के लिये ट्यूशन पढाते थे, इस बीच यूपी के बनारस की वर्षा श्रीवास्तव भी किशोर के साथ कोचिंग करती थी, पहले दोनों की दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई, दोनों ने नवंबर 2017 में लव मैरिज कर ली, दोनों का एक बच्चा भी है, वर्षा वकील है।

असिस्टेंट कमांडेंट की नौकरी छोड़ी
आईएएस या आईपीएस बनने का ख्वाब लेकर दिल्ली आये किशोर ने पहले ही प्रयास में 419वां रैंक हासिल किया, आईएएस या आईपीएस तो नहीं लेकिन एसएसबी में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चयन हुआ, 2013 में उत्तराखंड के पौड़ी गढबाल में एक साल की ट्रेनिंग पर चले गये, तब किशोर कुमार को एहसास हुआ कि उनहें अफसर बनकर अपने ही राज्य के लोगों की सेवा करनी चाबिये, ऐसे में 6 महीने के बाद ही ट्रेनिंग बीच में छोड़कर दिल्ली वापस लौटे, तथा फिर से यूपीएससी की तैयारी में जुट गये, 2015 में वो यूपीएससी में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन इस बार चयन नहीं हुआ, फिर वो रांची लौट आये, तथा कोचिंग संस्थान में पढाने लगे, साथ ही स्टेट पीसीएस की तैयारियों में जुट गये, 2016 में उन्होने परीक्षा पास की, तथा झारखंड पुलिस में डीएसपी बने, फिलहाल झारखंड पुलिस के स्पेशल इंडियन रिजर्व बटालियन में कार्यरत हैं।

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