SONIA NARANG

2004 में जब सोनिया नारंग गुलबर्ग जिले में तैनात थी, तो उन पर जिम्मेदारी थी कि वहां चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराया जाए।

वैसे तो देश में निडर आईपीएस अधिकारियों की कोई कमी नहीं है, आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी ही बहादुर महिला आईपीएस सोनिया नारंग की, सोनिया बचपन से ही सिविल सेवा में जाना चाहती थी, यही वजह है कि हाईस्कूल पास करते ही उन्होने यूपीएससी की तैयारी शुरु कर दी, चंडीगढ में पैदा हुई और पली बढी सोनिया नारंग ने 1999 में पंजाब यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन किया, होनहार सोनिया ने साइकोलॉजी में गोल्ड मेडल भी हासिल किया, सोनिया के पिता ए एन नारंग रिटायर्ड उप पुलिस अधीक्षक हैं, और उनके रोल मॉडल भी रहे हैं।

2002 बैच की आईपीएस
सोनिया कर्नाटक कैडर की 2002 बैच की आईपीएस है, अपनी नौकरी के दौरान सोनिया नारंग कर्नाटक के कई बड़े जिलों में तैनात रही, ये उनकी ईमानदारी और दिलेरी का ही नतीजा है कि वो जहां भी गई वहां से अपराधी भागने के लिये मजबूर हो गये, सोनिया नारंग तब सुर्खियों में आई, जब उन्होने साल 2006 में बीजेपी के एक बड़े नेता को थप्पड़ जड़ दिया था, दरअसल इस साल एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और बीजेपी के दो बड़े नेता आपस में भिड़ गये थे, तब आईपीएस अधिकारी सोनिया नारंग ने बीजेपी के एक नेता रेनुकाचार्य को सरेआम तमाचा जड़ दिया था।

सीएम से पंगा
जब सिद्धारमैया कर्नाटक के सीएम थे, तो आईपीएस सोनिया नारंग का नाम 16 करोड़ के खदान घोटाले में आया था, उस समय सीएम ने खुद विधानसभा में घोटाले से जुड़े अधिकारियों का नाम उजागर किया था, जिसमें सोनिया का भी नाम लिया था, लेकिन सोनिया नारंग ने सीएम से भी पंगा ले लिया था। तब महिला आईपीएस ने कहा था कि मेरी अंतरात्मा साफ है, आप चाहें तो किसी भी तरह की जांच करा लें, मैं इस आरोप का ना सिर्फ खंडन करती हूं, बल्कि इसका कानूनी तरीके से हर स्तर पर विरोध करुंगी।

बेहतरीन काम
2004 में जब सोनिया नारंग गुलबर्ग जिले में तैनात थी, तो उन पर जिम्मेदारी थी कि वहां चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराया जाए, दरअसल उस समय उस इलाके में आपराधिक गतिविधियां काफी तेज थी, सोनिया नारंग ने उस समय भी बेहतरीन काम किया था, बेलगाम में अपनी ड्यूटी के दौरान सोनिया ने बेहतरीन काम किया, बेलगाम में उस समय सांप्रदायिक हिंसा काफी बढी हुई थी।

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