Friday, April 23, 2021

IIT कानपुर से इंजीनियर, फर्राटेदार अंग्रेजी, अब सड़क पर भीख मांगता मिला!

सुरेन्द्र वशिष्ठ ने ये भी बताया कि उन्होने डीएबी कॉलेज लखनऊ से 1972 में एलएलएम किया है, उनके पिता जेसी मिल में सप्लायर थे।

सड़क पर भीख मांग कर गुजारा करने वाले ये बुजुर्ग आईआईटी कानपुर से पास आउट हैं, 90 साल की उम्र में ग्वालियर की सड़कों पर लोगों से मांग कर अपनी पेट भरते हैं, बातचीत में उन्होने बताया कि आईआईटी कानपुर से उन्होने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है। उन्होने अपना नाम सुरेन्द्र वशिष्ठ बताया पिता छेदा लाल वशिष्ठ हैं, कुछ दिन पहले टीआई मनीष मिश्रा को रेस्क्यू करने वाले संस्था ने ही अपनाया है, मनीष मिश्रा भी ग्वालियर के इसी संस्था में रह रहे हैं।

1969 बैच के छात्र
ग्वालियर स्थित आश्रम स्वर्ग सदन के विकास गोस्वामी ने एनबीटी से बात करते हुए बताया कि हमंने इन्हें ग्वालियर बस स्टैंड के पास बेसहारा हालत में पाया था, जब हमने उनसे बातचीत शुरु की, तो वो अंग्रेजी में बात करने लगे, जिसके बाद हम लोग उन्हें आश्रम लेकर आये, उनके रिश्तेदारों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, सुरेन्द्र वशिष्ठ ने बातचीत के दौरान हताया कि वो 1969 बैच के आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं।

पिता जेसी मिल में थे सप्लायर
सुरेन्द्र वशिष्ठ ने ये भी बताया कि उन्होने डीएबी कॉलेज लखनऊ से 1972 में एलएलएम किया है, उनके पिता जेसी मिल में सप्लायर थे, ये मिल साल 1990 में बंद हो गया था, इसी संस्था में रह रहे मनीष मिश्रा की स्थिति अब पहले से बेहतर है। करीब महीने भर पहले ग्वालियर में एक पुलिस अधिकारी मनीष मिश्रा भी अपने साथियों को सड़क पर भीख मांगते हुए मिले थे, उसके बाद साथियों ने इलाज के लिये इसी संस्था को सौंप दिया था, मनीष 1999 बैच के एएसआई थे, 2006 से तबीयत खराब होने के बाद वो गायब थे, साथियों को लगा कि पुलिस मुख्यालय उनका देखभाल कर रही है, लेकिन वो सड़क पर भीख मांगते हुए मिले, मनीष की पहचान उनके दो साथी रत्नेश सिंह तोमर और विजय भदौरिया ने की थी।

दयनीय हालत में मिले सुरेन्द्र
संस्था ने उनकी पहचान के लिये कुछ तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा है, फर्राटेदार अंग्रेजी, आत्मविश्वास से भरी हुई आवाज, ग्वालियर मिशहील स्कूल के टॉपर रहे उच्च शिक्षित बुजुर्ग सुरेन्द्र वशिष्ठ के कई मित्र इंजीनियर, डॉक्टर, एडवोकेट और बिजनेसमैन हैं, ये शिंदे की छावनी बस स्टैंड फुटपथ पर अत्यंत दयनीय हालत में मिले हैं। सुरेन्द्र भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं, संस्था के फैजान बेग ने बताया कि इन्होने शादी नहीं की है, इनके बारे में कुछ स्थानीय लोगों से सूचना मिली थी, उसके बाद हम लोग संस्था लेकर आये हैं।

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