Ankush-Kothari2

जब अंकुश आईआईटी से पढाई कर रहे थे, उसी समय इंटर्नशिप के दौरान उनकी मुलाकात कई आईएएस अधिकारियों से हुई, उनकी कार्यशैली देखकर वो बहुत प्रभावित हुए उन्होने यूपीएससी में जाने का मन बना लिया।

अगर कोई जिंदगी में कुछ करने की ठान लें, तो फिर तमाम मुश्किलों के बावजूद अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है, आज आपको यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2019 में देश भर में 429वां रैंक हासिल करने वाले अंकुश कोठारी की कहानी बताते हैं, जिन्होने बचपन से लेकर सिविल सेवा परीक्षा तक तमाम मुश्किलों का सामना किया, इसके बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया, तीसरे प्रयास में सिविल सर्विस का सपना किया किया।

माता-पिता हो गये थे अलग
अंकुश जब छोटे थे, तो उनके माता-पिता अलग हो गये, उनका पालन-पोषण मां ने किया, उनकी मां एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थी, तमाम जिम्मेदारियों के बीच उन्होने बेटे को अच्छी शिक्षा देने की कोशिश की, अंकुश भी बचपन से ही पढाई में होशियार थे, लेकिन पैसों की आर्थिक तंगी थी, इस वजह से उन्होने 12वीं में घर में रहकर ही आईआईटी की तैयारी की, और प्रवेश परीक्षा पास भी कर लिया, जिसके बाद उनका दाखिला आईआईटी कानपुर में हो गया।

इंटर्नशिप के दौरान अधिकारियों से हुए प्रभावित
जब अंकुश आईआईटी से पढाई कर रहे थे, उसी समय इंटर्नशिप के दौरान उनकी मुलाकात कई आईएएस अधिकारियों से हुई, उनकी कार्यशैली देखकर वो बहुत प्रभावित हुए उन्होने यूपीएससी में जाने का मन बना लिया। IAS-vs-IPS1 कॉलेज के बाद उन्हें सलाना 19 लाख रुपये की नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन उन्होने ठुकरा दिया, इसके बाद उन्होने यूपीएससी की तैयारी शुरु कर दी, शुरुआती दो कोशिश असफल रही, लेकिन उन्होने हार नहीं मानी, आखिरकार तीसरे प्रयास में उनका सपना पूरा हो गया।

अन्य कैंडिडेट्स को सलाह
शायद आपको जानकर हैरानी होगी, कि अंकुश ने यूपीएससी की तैयारी के दौरान किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली, सेल्फ स्टडी की बदौलत उन्हें यहां सफलता मिली, अंकुश का मानना है कि यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिये तीनों चीजों का ध्यान रखना बहुत जरुरी है, पहला स्मार्ट वर्क, दूसरा हार्ड वर्क और तीसरा धैर्य, उनका मानना है कि अगर आप स्मार्ट तरीके से धैर्य रखकर कड़ी मेहनत करेंगे तो परीक्षा में जरुर सफलता हासिल करेंगे।

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