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जिन देशों में लगभग सभी महिलाओं को खतना कराना पड़ता है, उनमें सोमालिया, जिबूती और गिनी शामिल है, ये तीनों देश अफ्रीकी महाद्वीप में है।

दुनियाभर में कई देश ऐसे हैं, जहां आज भी महिलाओं को हीनभावना से देखा जाता है, कभी धर्म तो कभी परंपरा के नाम पर अत्याचार होता है, ऐसी ही एक परंपरा या फिर यूं कहें कि अत्याचार है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन जिसे आसान भाषा में महिलाओं का खतना कहा जाता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोक के बावजूद दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जहां पर परंपरा के नाम पर आज भी महिलाओं का खतना आम बात है, एक रिसर्च के अनुसार दुनियाभर में करीब 20 करोड़ महिलाएं और लड़कियों का खतना हुआ है।

परंपरा या अत्याचार
अफ्रीकी देशों में ये परंपरा आम बात है, यमन, इराक, मालद्वीप तथा इंडोनेशिया में महिला खतना सबसे ज्यादा चलन में है, woman3 लेकिन ये प्रथा एशिया, मध्य, पूर्व लैटिन अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया तथा उत्तरी अमेरिका के कई विकसित देशों में आज भी जारी है, 2000 में यूनिसेफ के आंकड़े के अनुसार करीब 20 करोड़ बच्चियों तथा महिलाओं के जननांगों को नुकसान पहुंचाया गया है।

हर महिला का खतना
जिन देशों में लगभग सभी महिलाओं को खतना कराना पड़ता है, उनमें सोमालिया, जिबूती और गिनी शामिल है, ये तीनों देश अफ्रीकी महाद्वीप में है। महिलाओं के निजी अंग को जानबूझकर काटने की परंपरा को आम बोलचाल की भाषा में महिलाओं का खतना कहा जाता है, डब्लयूएचओ के मुताबिक ऐसी कोई भी प्रक्रिया जो बिना मेडिकल कारणों के महिला के गुप्तांग को नुकसान पहुंचाती है, वो इस श्रेणी में आती है।

खतने की उम्र
लड़कियों का खतना शिशु अवस्था से लेकर पंद्रह साल की उम्र के बीच होता है, आमतौर पर परिवार की महिलाएं ही इसे अंजाम देती है, ये प्रक्रिया लड़कियों तथा महिलाओं में केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक नुकसान भी पहुंचाती है। woman1 खतना की वजह से महिलाओं को रक्तस्त्राव, बुखार, संक्रमण तथा मानसिक आघात जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ मामलों में तो उनकी मौत भी हो जाती है। अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस प्रथा पर कानूनन रोक है, बावजूद ये प्रथा जारी है, जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह सामाजिक दबाव है।

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