Friday, April 23, 2021

ग्रेटा थनबर्ग के टूलकिट के पीछे खालिस्तानी कनेक्शन? सामने आया पूरा मामला!

पुलिस ने राजद्रोह, आपराधिक साजिश रचने, समूहों के बीच नफरत को बढावा देने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है, हालांकि इसमें ना तो ग्रेटा और ना ही किसी अन्य को आरोपी बनाया गया है।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल टीम ने स्वीडिश पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्ग की ओर से ट्वीट किये गये डॉक्युमेंट की जांच शुरु कर दी है, गुरुवार को इस संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा टूलकिट बनाने को लेकर एफआईआर दर्ज किया गया है, पुलिस इस टूलकिट को बनाने वालों तक पहुंचना चाहती है, उसका दावा है कि अब डिलीट कर दी गई शुरुआती टूलकिट में जनवरी और फरवरी के महीने में दिल्ली के भीतर अराजकता फैलाने की विस्तृत योजना थी, स्पेशल कमिश्नर प्रवीर रंजन ने कहा, शुरुआती जांच में पता चला है कि ये टूलकिट एक प्रो खालिस्तानी संस्था ने बनायी है, उन्होने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है, कि इस टूलकिट का मकसद विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों के बीच नफरत फैलाना और भारत सरकार के खिलाफ माहौल बनाना था।

गूगल से मांगा गया मूल दस्तावेज
पुलिस ने राजद्रोह, आपराधिक साजिश रचने, समूहों के बीच नफरत को बढावा देने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है, हालांकि इसमें ना तो ग्रेटा और ना ही किसी अन्य को आरोपी बनाया गया है, पुलिस ने मामले में कहा कि जांच में पता चलेगा कि आरोपित कौन है, उनका शक इस वजह से गहराया कि दस्तावेज के महत्वपूर्ण हिस्सों को मिटा दिया गया या फिर एडिट कर दिया गया, पुलिस एफआईआर के आधार पर गूगल को एक नोटिस भेजेगी और उससे मूल दस्तावेज की मांग करेगी।

एजेंसियों की नजर
सूत्रों का दावा है कि डॉक्युमेंट में जिन वेबसाइट्स, संस्थाओं का नाम था, उनंमें से कुछ पर अलग-अलग एजेंसियों की पहले से नजर थी, कमिश्नर ने कहा कि पुलिस सोशल मीडिया पर नजर बनाये हुए है, और तीन सौ से ज्यादा हैंडल्स की पहचान की गई, जो नफरती और दुर्भावनापूर्ण कंटेंट को बढावा दे रहे हैं, उन्होने कहा कि साफ संकेत हैं कि डीप स्टेट के लोग इसके पीछे हैं, या फिर जल्द इसमें शामिल होंगे।

कनाडा के प्रो खालिस्तानी ग्रुप ने बनाई टूलकिट
सरकार से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिये इस टूलकिट को पीस फॉर जस्टिस नाम की एक संस्था ने बनाया था, जिसके सह संस्थापकों में स्वयंभू खालिस्तान समर्थक मो धालीवाल का नाम शामिल है, जो कनाडा के वैंकूवर में रहता है, पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन में भारत को निशाना बनाने के लिये एक लिस्ट में काम बताये गये थे, एक में भारत की योग और चाय की छवि को ध्वस्त करना, दूसरे में 26 जनवरी को प्रवासियों में एकजुट होकर वैश्विक व्यवधान डालना तथा कृषि कानूनों को वापस लेना शामिल था, ग्रेटा ने पोस्ट डिलीट कर दी थी, लेकिन उससे पहले बहुतों ने स्क्रीनशॉट ले लिये या फिर डॉक्युमेंट के अलग-अलग हिस्से सेव कर लिये, बाद में ये वायरल हो गये।

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