पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हुआ चीन! राजदूत ने स्वीकारी गलवान की सच्चाई!

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चीन कभी भी सच दुनिया को नहीं बताता, हाल ही में कोरोना को लेकर भी उसने कई चीजें छुपाने की कोशिश की है, इसके साथ ही वो युद्ध में मारे गये सैनिकों की संख्या भी नहीं बताता।

चीन की चालबाजी से पूरी दुनिया वाकिफ है, सच्चाई को छुपाना इस देश की पुरानी आदत रही है, सरकार वहां क्या करती है, इस बारे में आम नागरिकों को जानकारी भी नहीं दी जाती, 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में में क्या हुआ, भारतीय फौज के 20 सैनिक शहीद हो गये, ये तो पूरी दुनिया को पता है, लेकिन कितने चीनी फौजी मारे गये, इस बारे में गिने-चुने लोगों को जानकारी है। दस दिनों की चुप्पी के बाद पहली बार भारत में चीन के राजदूत सुन वेडोंग ने माना कि हिंसक झड़प में चीनी फौजियों की भी मौत हुई है।

राजदूत से स्वीकारी सच्चाई
न्यूज एजेंसी पीटीआई के दिये एक इंटरव्यू में वेडोंग ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच भयंकर हिंसक शारीरिक संघर्ष हुआ, इसमें चीन के सैनिक भी हताहत हुए हैं, इससे पहले चीन ने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है, वो अभी तक नहीं बता रहा था कि एलएसी पर कितनी मौतें हुई है, दावा किया जा रहा है कि गलवान में चीन के 45 से ज्यादा फौजी मारे गये हैं, लेकिन चीन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

चीन छुपाता है आंकड़ा
चीन कभी भी सच दुनिया को नहीं बताता, हाल ही में कोरोना को लेकर भी उसने कई चीजें छुपाने की कोशिश की है, इसके साथ ही वो युद्ध में मारे गये सैनिकों की संख्या भी नहीं बताता, xingping china 1962 में भारत के साथ युद्ध में कितने चीनी मारे गये थे, इसकी जानकारी पड़ोसी ने 1990 के बाद दी थी, वो भी आधा-अधूरा, कहा जा रहा है कि इस बार चीन के नागरिक फौजियों को सम्मान ना देने से बेहद नाराज हैं।

सरकारी अखबार ने दी श्रद्धांजलि
इससे पहले पिछले दिनों चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू जीजीन ने पीएलए अधिकारियों तथा मारे गये फौजियों को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा था कि मेरा मानना है कि china nepal मृतकों का सेना में सर्वोच्च सम्मान के साथ व्यवहार किया गया है, सही समय पर सूचना समाज को दी जाएदी, ताकि नायकों को सम्मानित किया जा सके, साथ ही उन्हें याद किया जा सके।

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