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यहां रहने वाली करीब 30 से 40 फीसदी बच्चियों ने ये दबी जुबान में स्वीकार किया है कि जरुरत पड़ने पर उन्हें भी देह व्यापार करना पड़ता है।

किसी शहर या गांव में एक दो या 10 लोग बदनाम हो सकते हैं, लेकिन पूरा का पूरा शहर या गांव कैसे बदनाम हो गया, तो आइये आज हम आपको बताते हैं बिहार के मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान के बारे में, जो जिस्मफरोशी के धंधे को लेकर पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में बदनाम है, यहां राज्य का सबसे बड़ा जिस्म की मंडी लगती है, यहां सभी सेक्स वर्करों को नाचने-गाने की सरकार से मान्यता प्राप्त है, लेकिन नाचने-गाने की आड़ में ये लोग देह व्यापार भी करते हैं।

चतुर्भुज स्थान का इतिहास
मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान का इतिहास सदियों पुराना है, या फिर यूं कहें कि ये चतुर्भुज स्थान मुगलकालीन जमाने से ही यहीं पर स्थित है, भारत नेपाल सीमा से सटे इस स्थान का नाम वहां स्थित मंदिर के नाम पर रखा गया था। पुराने जमाने में यहां लोग काम करने वाली महिलाओं को शिवदासी कहते थे, देह व्यापार कर अपना जीवन यापन करने वाली ऐसी हजारों महिलाएं हैं, जिनकी कमाई 10 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक रोजाना होती है, यहां बसे परिवारों का पारंपरिक पेशा देह व्यापार ही है।

बच्चों को भी है कुछ करने की आशा
चतुर्भुज स्थान गली में रहने वाले बच्चों को भी पढ-लिख कर कुछ करने की उम्मीद है, 10 वर्षीय रेशमा (बदला नाम) जो चौथी क्लास में पढती हैं, उनका कहना है कि वो पढ लिख कर टीचर बनना चाहती हैं, लेकिन उसके मां-बाप के द्वारा जबरन उसे इस दलदल में धकेलने की कोशिश की जा रही है, वहीं इस इलाके में रहने वाले अरबाज ने कहा कि जब भी घर पर कोई गैर मर्द आता है, तो उसे बहुत गुस्सा आता है, लेकिन मां कहती है कि धंधा नहीं करुंगी तो खिलाऊंगी कहां से, जिसे सुनने के बाद पेट की आग की वजह से चुप रहना पड़ता है, आपको बताते चलें कि इस बस्ती में रेशमा जैसी अनगिनत ऐसी बेटियां है, जो पढ लिखकर कुछ बड़ा करना चाहती हैं।

एड्स से पीड़ित बच्चियां
यहां रहने वाली करीब 30 से 40 फीसदी बच्चियों ने ये दबी जुबान में स्वीकार किया है कि जरुरत पड़ने पर उन्हें भी देह व्यापार करना पड़ता है, वहीं कुछ ऐसी बच्चियां है, जिनके मां-बाप उन्हें इस धंधे में नहीं धकेलते हैं, आपको बता दें कि इस इलाके में एड्स से पीड़ित बच्चियां भी रहती हैं।

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