निर्भया के दोषियों को फांसी देने से पहले छलका जल्लाद का दर्द, मोदी-योगी से खास अपील

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पवन जल्लाद ने बताया कि पिता के बाद से मैं इस काम को विभिन्न जेलों में जाकर अंजाम दे रहा हूं, कुछ समय पहले तक मुझे मेरठ जेल से तीन हजार रुपये महीना मानदेय मिलता था।

दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद निर्भया सामूहिक दुष्कर्म कांड के दोषियों को फांसी देने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है, उन्हें फांसी पर लटकाने की तैयारी चल रही है, यूपी के मेरठ के रहने वाले पवन जल्लाद को बुलाने के लिये पत्र लिखा गया है, लेकिन फांसी से पहले पवन जल्लाद ने पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी से एक मार्मिक अपील की है, अब तो जीना मुश्किल हो गया है, कहते हुए उन्होने एक लेटर लिखकर अपनी आपबीती सुनाई है।

पीढी दर पीढी फांसी देने का काम कर रहा परिवार
पवन मेरठ के आलोक विहार कालोनी में रहते हैं, उनकी परिवार पीढी दर पीढी जेल में फांसी देने का काम करता है, पवन से पहले उनके परदादा लक्ष्मण सिंह, दादा कल्लू जल्लाद और पिता मम्मू सिंह भी फांसी देने का काम करते थे, इसी परंपरा को आगे बढाते हुए अब पवन फांसी देते हैं, पवन की पत्नी, बच्चों संग छोटे-बड़े भाइयों वाला संयुक्त परिवार है, निर्भया के दोषियों को फांसी दिये जाने का जिक्र आते ही पवन एक बार फिर से सुर्खियों में आ गये हैं।

बयां किया दर्द
पवन जल्लाद ने बताया कि पिता के बाद से मैं इस काम को विभिन्न जेलों में जाकर अंजाम दे रहा हूं, कुछ समय पहले तक मुझे मेरठ जेल से तीन हजार रुपये महीना मानदेय मिलता था, मैने भरपूर कोशिश की, जिसके बाद मानदेय बढाकर 5 हजार रुपये महीना हुआ। लेकिन आज की इस महंगाई की दौर में 5 हजार रुपये नाकाफी साबित हो रहे हैं, परिवार का पालन-पोषण करना कठिन होता जा रहा है, मैं बीते काफी समय से लगातार संबंधित अधिकारियों से मानदेय बढाने के संबंध में गुहार लगा रहा हूं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

मुश्किल हो गया घर चलाना
पवन ने कहा कि मेरा मकान टूट-फूट गया है, बच्चे बड़े हो रहे हैं, उनकी पढाई-लिखाई कराना मुश्किल हो रहा है, कई बार तो स्कूल की फीस तक नहीं दे पाता, इस परेशानी को देखते हुए मेरे बेटे ने इस काम को करने के लिये अभी से मना कर दिया है, आर्थिक परेशानियों की वजह से जीना मुश्किल हो गया है, साइकिल पर कपड़े रखकर गली-गली फेरी लगाता हूं, तो कहीं जाकर दो समय का रोटी जुगाड़ पाता हूं।

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