Virat Captain

प्रैक्टिस मुकाबले में मयंक अग्रवाल पृथ्वी शॉ के साथ ओपनिंग करने उतरे, न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भी इन्हीं दोनों ने ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाली थी।

न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में 0-3 से हार का सामना करने के बाद अब विराट सेना की नजर टेस्ट सीरीज पर है, टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया शुक्रवार को न्यूजीलैंड इलेवन के खिलाफ प्रैक्टिस मुकाबला खेलने के लिये उतरी, हालांकि इस मुकाबले में टीम संयोजन और ओपनिंग जोड़ी को लेकर विराट कोहली ने जो फैसला लिया, उससे फैंस उलझन में पड़ गये हैं।

कोहली ने फैसलों ने किया हैरान
प्रैक्टिस मुकाबले में मयंक अग्रवाल पृथ्वी शॉ के साथ ओपनिंग करने उतरे, न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भी इन्हीं दोनों ने ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाली थी, हालांकि इस मुकाबले में मयंक को आराम दिया जाना चाहिये था, क्योंकि वो लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं, पहले इंडिया ए के लिये फिर टीम इंडिया के लिये लगातार खेल रहे हैं, शुभमन को पृथ्वी के साथ ओपनिंग के लिये भेजा जा सकता था, ताकि ये तय किया जा सके कि दोनों में से पहले टेस्ट में कौन ओपनिंग करने उतरेगा।

अजब-गजब क्रम
इसके बाद तीसरे नंबर पर चेतेश्वर पुजारा बल्लेबाजी के लिये आये, पुजारा के आने के बाद मयंक भी 1 रन बनाकर लौट गये, फैंस को उम्मीद थी कि नंबर चार पर कप्तान विराट कोहली आएंगे, लेकिन विराट ने अपनी जगह शुभमन गिल को भेज दिया, हालांकि वो भी पृथ्वी की तरह बिना खाता खोले लौट गये, गिल के आउट होने के बाद अजिंक्य रहाणे और फिर हनुमा विहारी क्रीज पर आये, विराट कोहली इस मुकाबले में बल्लेबाजी करने नहीं उतरे।

बल्लेबाजी क्रम को लेकर उलझन में विराट
विराट कोहली के फैसले से सभी को हैरानी हो रही है, टीम संयोजन को देखकर ये समझ पाना मुश्किल है कि आखिर विरकाट किस तरह का बैटिंग क्रम चाहते हैं, उन्होने नियमित सलामी बल्लेबाज शुभमन दिल से शुरुआत ना करवाकर उन्हें नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिये भेजा, इससे ये साफ नहीं हो पा रहा है, कि आखिर शुभमन को वो किस नंबर पर खिलाना चाहते हैं, क्योंकि जिस नंबर पर गिल बल्लेबाजी करने उतरे, वो विराट का नंबर है।

खिलाड़ियों में कम भरोसा
कप्तान कोहली के फैसलों की वजह से टीम में अपनी जगह को लेकर किसी भी तरह का विश्वास नहीं है, इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी कम होता है, कई बार किसी खिलाड़ी को बिना वजह बताये विराट टीम से बाहर कर देते हैं, इससे उनके आत्मविश्वास पर बड़ा असर होता है। उदाहरण के तौर पर मनीष पांडे हैं, जिन्हें बार-बार अंदर बाहर किया जा रहा है, कभी केदार जाधव तो कभी शिवम दूबे को उनकी जगह मौका दे दिया जाता है।

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