शार्दुल ठाकुर का वजन पहले काफी ज्यादा था, लेकिन उन्होने इसे कम किया, वो अब फिटनेस पर काफी मेहनत करते हैं।

शार्दुल ठाकुर ने ओवल टेस्ट में दमदार प्रदर्शन किया, उन्होने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल दिखाया, जिसके बाद कई दिग्गज हस्तियों ने उनकी तारीफ की, हालांकि महाराष्ट्र के पालघर के रहने वाले इस तेज गेंदबाज का यहां तक का सफर आसान नहीं रहा, वो किसी संपन्न परिवार से नहीं हैं, इस वजह से उन्हें रोजाना लोकल ट्रेन से सफर करके मुंबई आना पड़ता था, आइये उनके संघर्ष के बारे में आपको बताते हैं।

रोजाना ट्रेन में सफर
शार्दुल बचपन से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन पालघर में बेहतर सुविधाएं ना होने की वजह से उनका परिवार बोइसर शिफ्ट हो गया था, उन्होने स्कूली क्रिकेट में बोरिवली के अपने स्कूल के लिये खेलते हुए 6 गेंद में 6 छक्के जड़ दिये थे, मुंबई के लिये खेलने से पहले उन्होने कड़ी मशक्कत की, बाद में उन्हें रणजी टीम में मौका मिला, वो रोजाना मुंबई जाने के लिये ट्रेन से सफर करते थे।

पैर की सर्जरी
शार्दुल को 2 साल पहले अपने पैर की सर्जरी भी करानी पड़ी थी, वो तब आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स के लिये खेले थे, बाद में चोट की वजह से उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी, उन्होने लंदन में अपनी सर्जरपी कराई थी, फिर मैदान पर शानदार वापसी की। शार्दुल ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी गाबा टेस्ट में कमाल की अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम इंडिया को जीत दिलाई थी, शार्दुल ऐसे खिलाड़ी हैं, जो बड़े मौके पर अहम योगदान देते हैं और विरोधी टीम को ऐसे ही खिलाड़ियों से सबसे ज्यादा खतरा होता है।

वजन को लेकर परेशान
शार्दुल ठाकुर का वजन पहले काफी ज्यादा था, लेकिन उन्होने इसे कम किया, वो अब फिटनेस पर काफी मेहनत करते हैं, उन्होने जब डेब्यू किया था, तो 10 नंबर की जर्सी पहन ली थी, जिसके लिये उन्हें खूब ट्रोल किया गया था। ये जर्सी नंबर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का भी था, इस वजह से उन्हें ट्रोल किया गया था, इसके बाद बीसीसीआई ने इस नंबर को रिटायर कर दिया, यानी अब ये नंबर किसी और की जर्सी पर नहीं दिखेगा।

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