प्रथम श्रेणी में डेब्यू तक का सफर रवि के लिये आसान नहीं रहा है, वो पिछले तीन साल से एमपी टीम में बतौर नेट बॉलर जुड़े रहे हैं।

हर गेंदबाज का सपना हैट्रिक विकेट लेने का होता है, अगर ये डेब्यू मैच में ही मिल जाए, तो फिर कहना क्या, डेब्यू मैच में भी पहले ही ओवर में मिल जाए, तो फिर सोने पर सुहागा, एक गेंदबाज ने ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया है, जो आजतक कोई नहीं कर सका है, दरअसल एमपी और यूपी के बीच गये रणजी मुकाबले में रवि यादव नाम के बायें हाथ के तेज गेंदबाज ने ऐसा कारनामा किया है, कि पूरी दुनिया में उनकी चर्चा हो रही है, आइये विस्तार से उनके बारे में बताते हैं।

डेब्यू मैच में कारनामा
हाल ही में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने वाले रवि यादव अनोखे कीर्तिमान के मालिक बन गये हैं, रवि मूल रुप से यूपी के फिरोजाबाद के रहने वाले हैं, उन्होने एमपी की ओर से खेलते हुए अपने पदार्पण मैच में ही लगातार तीन गेंदों पर तीन विकेट हासिल किये, उन्होने ये असाधारण उपलब्धि अपने गृह राज्य यूपी के खिलाफ ही बनाया, 27 जनवरी को इंदौर में खेले गये मुकाबले में कप्तान ने सातवें ओवर में उन्हें आक्रमण पर लगाया, बस फिर क्या था, उन्होने पहले ही ओवर की तीसरी गेंद पर यूपी के आर्यन जुयाल का विकेट हासिल किया, फिर अगली दो गेंदों पर अंकित राजपूत और समीर रिजवी का विकेट लेकर इतिहास रच दिया।

आंकड़े क्या कहते हैं
अब जरा रिकॉर्ड बुक पर नजर डालते हैं, तो करीब 80 साल पहले दक्षिण अफ्रीका के रिकी फिलिप्स ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के पहले ही ओवर में हैट्रिक लिया था, हालांकि इससे पहले उन्होने 4 मैच और खेले थे, लेकिन उन्हें गेंदबाजी का मौका नहीं मिला था, यानी ये मुकाबला उनका पांचवां मैच था, लेकिन हैट्रिक उन्होने पहले ही ओवर में ली, भारतीय गेंदबाजों की बात करें, तो सात और गेंदबाजों ने अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू मैच में हैट्रिक लिया है, जिसमें जवागल श्रीनाथ और अभिमन्यु मिथुन जैसे नाम है, हालांकि रवि की हैट्रिक सबसे अलग है, क्योंकि उन्होने पहले ही ओवर में ऐसा कारनामा किया है।

तीन साल से नेट बॉलर
प्रथम श्रेणी में डेब्यू तक का सफर रवि के लिये आसान नहीं रहा है, वो पिछले तीन साल से एमपी टीम में बतौर नेट बॉलर जुड़े रहे हैं, जिसके बाद उनके खेलने का सपना पूरा हुआ है, यूपी के लिये जूनियर क्रिकेट खेले चुके रवि ने अंडर 19 वीनू मांकड़ ट्रॉफी में डेब्यू किया था, उनका पहला मुकाबला एमपी के खिलाफ ही था, अब 11 साल बाद एमपी के लिये खेल रहे हैं और यूपी के खिलाफ डेब्यू किया।

नौकरी का ऑफर ठुकराया
रवि ने एक लीडिंग वेबसाइट से बात करते हुए कहा कि फिरोजाबाद में कुछ खास क्रिकेट का माहौल नहीं है, उनका चयन स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ के लिये हो गया था, जहां वो साल 2004 से 2008 तक रहे, यहीं से आरपी सिंह और सुरेश रैना जैसे क्रिकेटर निकले हैं, हालांकि 2010 से 2014 के बीच चोट की वजह से वो क्रिकेट से दूर रहे, रवि ने बताया कि उन पर क्रिकेट का जूनून इस कदर सवार था कि उन्होने रेलवे की नौकरी ऑफर को भी ठुकरा दिया, घर का बिजनेस ठीक नहीं चल रहा था, तब भी मैंने नौकरी नहीं स्वीकारी, घर वालों को जब इस बात का पता चला तो वो नाराज हुए, लेकिन मेरी जिद थी, कि मैं एक दिन कर दिखाऊंगा, ऊपर वाले पर भरोसा था कि एक मौका जरुर मिलेगा। रवि यादव ने बताया कि यूपी से मौका नहीं मिलने के बाद साल 2016 में एक दोस्त के कहने पर मुरैना (एमपी) ट्रायल देने गया, जहां एमपीसीए के तहत डिस्ट्रिक्ट ट्रायल्स चल रहे थे, यहां सफल होने के बाद नेट बॉलर के रुप में मौका मिला, रवि ने कहा कि फिट रहा और टीम के लिये विकेट लेता रहा, तो मौके मिलते रहेंगे।

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