टी-20 विश्वकप के पहले ही मुकाबले में कोहराम मचाने वाली पूनम यादव का जन्म 24 अगस्त 1991 को आगरा में हुआ था।

महिला टी-20 विश्वकप का आगाज हो चुका है, टीम इंडिया ने उद्धाटन मुकाबले में मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 17 रनों से धूल चटा दी, भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में सिर्फ 132 रन ही बनाये, जवाब में मेजबान टीम 115 रनों पर ढेर हो गई, इस मुकाबले में हीरो पूनम यादव रही, जिन्होने अपनी घूमती गेंदों से मैच का पासा पलट दिया, पूनम ने 4 ओवर में 19 रन देकर 4 विकेट हासिल किये।

इसलिये पहनती है 24 नंबर की जर्सी
विश्वकप के पहले ही मुकाबले में कोहराम मचाने वाली पूनम यादव का जन्म 24 अगस्त 1991 को आगरा में हुआ था, इसी वजह से वो 24 नंबर की जर्सी पहनती है, पूनम के पिता रघुवीर सिंह रिटायर्ड ऑर्मी अधिकारी हैं, आज भी टॉम ब्वॉय की तरह रहने वाली पूनम बचपन से ही लड़कों की तरह रहती थी, उन्हीं की तरह कपड़े पहनना और लड़कों के साथ ही क्रिकेट खेलती थी।

पिता ने कर दिया था मना
पूनम जब 8 साल की थी, तब से ही क्रिकेट खेलने स्टेडियन जाने लगी, लेकिन समाज के दबाव से उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट खेलने से रोका, लेकिन क्रिकेट में तो पूनम की सांस बसती थी, इसलिये एक दिन घर में बिना कुछ बताये ही वो स्टेडियम के लिये निकल पड़ी, फिर वापस कोच हेमलता काला के साथ लौटी, जिन्होने उनकी मम्मी-पापा को इस बात के लिये मनाया कि पूनम को क्रिकेट खेलने दें। इसके बाद वो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखी।

भेदभाव का सामना
हालांकि यहां तक का सफर स्पिन गेंदबाज के लिये आसान नहीं रहा है, उन्हें भेदभाव का भी सामना करना पड़ा, अकसर उनके आस-पड़ोस के लोग यही कहते थे कि कैसे एक लड़की लड़कों के साथ क्रिकेट खेल सकती है, कैसे वो देर शाम तक घर से बाहर रह सकती हैं, हालांकि पूनम ने कभी फालतू की बकवास पर ध्यान नहीं दिया और अपने सपनों को पूरा करने में डटी रही।

रेलवे से टीम इंडिया तक का सफर
जल्द ही पूनम यादव का चयन सेंट्रल जोन टीम में हो गया, इसके बाद वो यूपी महिला टीम का भी हिस्सा बन गई, उन्होने घरेलू स्तर पर रेलवे का प्रतिनिधित्व किया, रेलवे से जुड़ने के बाद पूनम की जिंदगी बदल गई, उनका खेल भी सुधरा, फिर 2013 में बांग्लादेश के खिलाफ उन्हें टीम इंडिया में डेब्यू का मौका मिला, इसके बाद वो भारतीय टीम का हिस्सा बन गई हैं।

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