12वीं फेल, मैदान पर गुजारी कई रातें, फिर टीम इंडिया में चयन, बेहद प्रेरणादायक है इस बल्लेबाज की कहानी

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Murli Vijay

घर छोड़ने के बाद मुरली चेन्नई आ गये, शुरुआती दिनों में कुछ दोस्तों के घर रातें गुजारी, कई बार को उन्हें चेन्नई के वाईएमसीए और आईआईटी क्रिकेट मैदान पर भी सोना पड़ा।

130 करोड़ की आबादी वाले देश में क्रिकेट धर्म की तरह माना जाता है, यहां हर गली मुहल्ले में लोग क्रिकेट खेलते हैं, ऐसे में टीम इंडिया तक पहुंच पाना आसान नहीं होता, 61 टेस्ट, 3982 रन, 12 सेंचुरी और 15 हाफ सेंचुरी, ये आंकड़े भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज मुरली विजय के हैं, जिन्होने टीम इंडिया के लिये मुश्किल परिस्थितियों में ओपनिंग की और कई मैच भी जिताये, 36 वर्षीय बल्लेबाज लंबे समय से टीम से बाहर हैं, लेकिन अपने दौर में उन्होने वो कर दिखाया, जो उनके परिवार ने भी नहीं सोचा था, उनके पिता को लगता था कि बेटा चपरासी बनेगा। आइये विजय के संघर्ष की कहानी आपको बताते हैं।

12वीं में फेल
1 अप्रैल 1984 को चेन्नई के सामान्य परिवार में पैदा हुए मुरली विजय पढाई में होशियार नहीं थे, उनका पढाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था, वो 12वीं बोर्ड एग्जाम में फेल हो गये, फेल होने के बाद मुरली ने अपना घर छोड़ दिया, जिसके बाद उनके पिता को लगा कि बेटा हताशा में जान ना दे दे, लेकिन मुरली ने कुछ और ही लक्ष्य बना रखा था, उन्होने अपने माता-पिता को भरोसा दिया, कि वो कोई गलत कदम नहीं उठाएंगे। बस अपने मुताबिक जिंदगी जीना चाहता हूं, खुद को पहचानना चाहता हूं।

मैदान पर गुजारी रातें
घर छोड़ने के बाद मुरली चेन्नई आ गये, शुरुआती दिनों में कुछ दोस्तों के घर रातें गुजारी, कई बार को उन्हें चेन्नई के वाईएमसीए और आईआईटी क्रिकेट मैदान पर भी सोना पड़ा, वो क्रिकेट खेलते रहे, साथ ही अपना खर्च चलाने के लिये स्नूकर पार्लर में काम करते थे। मुरली की प्रतिभा को टीम इंडिया के मौजूदा गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने पहचाना, उन्होने उन्हें चेन्नई क्रिकेट लीग में खेलने का न्योता दिया, यहीं से उनकी जिंदगी से करवट ली, इस लीग में उन्होने बल्ले से धमाल मचाया।

रणजी टीम में चयन नहीं
इसके बाद तमिलनाडु रणजी टीम में वो ट्रायल देने पहुंचे, लेकिन पहली बार में उनका चयन नहीं हुआ, क्योंकि उनके बाल लंबे थे, सो वो चयनकर्ताओं को प्रभावित नहीं कर सके, हालांकि 2006 में उनका चयन रणजी टीम में हुआ, दिल्ली के खिलाफ डेब्यू मुकाबले में ही उन्होने 59 रनों की पारी खेली, इसके बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा, मुरली सीमित ओवरों में उतने सफल नहीं हो पाये, लेकिन आईपीएल में उनके नाम दो शतक है।

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