IPL में भी चीन से नाता तोड़ने की उठी मांग, प्रिटी जिंटा की टीम ने खुलकर उठायी आवाज

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ness wadia

चीन की मोबाइल फोन कंपनी वीवो आईपीएल की टाइटल प्रायोजक है, 2022 तक चलने वाले इस करार के तहत वो प्रत्येक साल बीसीसीआई को 440 करोड़ रुपये देती है।

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में चीन की नापाक हरकत के बाद अब भारत में भी उनके खिलाफ माहौल गर्म हो चुका है, सरकार ने 59 चीनी ऐप्स को भारत में बैन कर दिया है, अब मंगलवार को किंग्स इलेवन पंजाब के मालिक नेस वाडिया ने चीनी कंपनियों के प्रायोजन को खत्म करने की मांग कर दी है, उन्होने कहा कि आईपीएल से चीनी कंपनियों के प्रायोजन को धीरे-धीरे खत्म किया जाए, आपको बता दें कि गलवान घाटी में 15 जून को 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे, जिसके बाद से चीन के खिलाफ भारतीयों का गुस्सा चरम पर है।

देश के खातिर चीनी कंपनियों से तोड़ें नाता
गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद बीसीसीआई को चीन की कंपनियों द्वारा प्रयोजन की समीक्षा करने के लिये आईपीएल संचालन समिति की बैठक बुलानी पडी, हालांकि ये मीटिंग अभी तक नही हो पाई है, सोमवार को 59 चीनी एप्पस पर बैन कर दिया गया, नेस वाडिया ने मंगलवार को पीटीआई से कहा कि हमें देश के खातिर आईपीएल में चीन के प्रायोजकों से नाता तोड़ना चाहिये, देश पहले है, पैसा बाद में आता है, ये इंडियन प्रीमियर लीग है चीन प्रीमियर लीग नहीं, इसे उदाहरण पेश करना चाहिये, और रास्ता दिखाना चाहिये, नेस वाडिया ने कहा कि हां शुरुआत में प्रायोजक ढूंढना मुश्किल होगा लेकिन मुझे लगता है कि पर्याप्त भारतीय प्रायोजक मौजूद हैं, जो उनकी जगह ले सकते हैं, हमें देश और सरकार का सम्मान करना चाहिये, सबसे महत्वपूर्ण सैनिकों को जो हमारे लिये अपना जीवन जोखिम में डालते हैं।

चीनी कंपनी है आईपीएल प्रायोजक
आपको बता दें कि चीन की मोबाइल फोन कंपनी वीवो आईपीएल की टाइटल प्रायोजक है, 2022 तक चलने वाले इस करार के तहत वो प्रत्येक साल बीसीसीआई को 440 करोड़ रुपये देती है, आईपीएल से जुड़ी कंपनियों पेटीएम, स्विगी और ड्रीम इलेवन में भी चीन की कंपनियों का निवेश है, सिर्फ आईपीएल ही नहीं बल्कि बाकी टीमों को भी चीन की कंपनियां प्रयोजित कर रही हैं, वाडिया ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, लेकिन सीएसके समेत अन्य टीमों ने कहा कि वो सरकार के फैसले को मानेगी। सीएसके सूत्र ने दावा किया कि शुरुआत में उनकी जगह लेना मुश्किल होगा, लेकिन अगर देश के खातिर कड़ा फैसला लिया जाता है, तो वो साथ हैं।

सरकार को फैसला लेने दीजिए
एक अन्य फ्रेंचाइजी के मालिक ने कहा कि सरकार को फैसला करने दीजिए, जो भी फैसला होगा, हम उसे मानेंगे, नेस वाडिया ने कहा कि इस विवादस्पद मामले में सरकार के फैसला का इंतजार करना सही नहीं है, क्योंकि इस समय देश के साथ खड़े रहना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है, उन्होने कहा कि अगर मैं बीसीसीआई का अध्यक्ष होता, तो मैं कहता है कि अगले सीजन के लिये मुझे भारतीय प्रायोजक चाहिये, वाडिया ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर चीन की ऐप्पस को प्रतिबंधित करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

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