भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने कहा कि ये पुनर्जन्म है, 41 साल हो गये, अब हमने पदक जीत लिया, जिससे युवा खिलाड़ियों को हॉकी खेलनी की प्रेरणा और ऊर्जा मिलेगी।

भारतीय हॉकी पुरुष टीम ने ओलंपिक में अपने स्वर्ण पद का अभियान 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में शुरु किया था, तब हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का पूरे विश्व में बोलबाला था, उन्होने अपनी हॉकी स्टिक से ऐसा जादू चलाया कि 1928 से 1936 तक देश ने इन खेलों में स्वर्णिम हैट्रिक लगा दी थी, हॉकी में भारत ने लगातार 10 पदक जीते थे, लेकिन 1980 में मास्को ओलंपिक में स्वर्ण जीतने के बाद भारतीय हॉकी में ऐसा सूखा आया, कि टीम को पदक जीतने के लिये 41 साल इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कितने दिग्गज आये और गये, लेकिन ओलंपिक में कोई पदक नहीं ला सके, अब टोक्यो में कांस्य पदक जीतक भारतीय हॉकी का पुर्नजन्म हुआ है।

इनामों की बारिश
2.5 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार प्रदेश के हर हॉकी खिलाड़ी को देगी, इसके साथ ही उन्हें खेल विभाग में नौकरी तथा रियायती दर पर प्लॉट दिये जाएंगे।
1 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि एमपी सरकार विवेक सागर तथा नीलाकांता को देगी।

ज्यादातर पंजाब के खिलाड़ी
1 करोड़ रुपये पंजाब सरकार अपने प्रदेश के खिलाड़ियों को देगी, कप्तान मनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह, रुपिंदर पाल सिंह, हार्दिक सिंह, शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, गुरजंत सिंह तथा मनदीप सिंह पंजाब से हैं।

पुनर्जन्म है
भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने कहा कि ये पुनर्जन्म है, 41 साल हो गये, अब हमने पदक जीत लिया, जिससे युवा खिलाड़ियों को हॉकी खेलनी की प्रेरणा और ऊर्जा मिलेगी, ये खूबसूरत खेल है, हमने युवाओं को हॉकी खेलने का एक कारण दिया है, जीत के बाद भारतीय खिलाड़ी जहां रोते हुए एक –दूसरे के गले लग रहे थे, वहीं श्रीजेश गोलपोस्ट पर बैठ गये थे, उन्होने कहा मैं आज हर बात के लिये तैयार था, क्योंकि वो 60 मिनट सबसे महत्वपूर्ण थे, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहा हूं, और मैंने खुद से इतना ही कहा कि 21 साल का अनुभव इस 60 मिनट में दिखा दो, एक पेनाल्टी बचानी है, पूरे ओलंपिक में श्रीजेश ने कई मौकों पर भारतीय टीम के लिये संकटमोचक की भूमिका निभाई।

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