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मौसम विभाग की ओर से कहा गया था कि मैच में अधिकतर समय बादल छाये रहेंगे, ऐसे में प्लेइंग इलेवन चुनते समय दो बातें साफ थी, पहली मैच में तेज गेंदबाजों का दबदबा रहेगा।

टीम इंडिया न्यूजीलैंड से आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल जिस अंदाज में हारी, वो फैंस को सालों तक सालती रहेगी, अगर आप फाइनल पर बारीक नजर रख रहे थे, तो मानेंगे कि विराट कोहली ने टॉस से पहले ही ऐसी बड़ी गलती कर दी थी, जो इसे अंत तक परेशान करती रही, ये गलती थी अश्विन और जडेजा दोनों को एक साथ प्लेइंग इलेवन में रखना, वैसे को टीम प्रबंधन ने इसी गलती नहीं माना, इसके बचाव में टीम का संतुलन का हवाला दिया, लेकिन संजय मांजरेकर जैसे कई पूर्व क्रिकेटरों ने मैच शुरु होने से पहले ही कह दिया था कि इस साउथैम्प्टन की पिच पर भारत को दो स्पिनर के साथ उतरने की जरुरत नहीं है।

बैलेंस टीम
भारत और न्यूजीलैंड के बीच फाइनल 18 से 23 जून के बीच इंग्लैंड के साउथैम्प्टन में खेला गया, मैच से कई दिन पहले से ही साउथैम्प्टन में जोरों की बारिश हो रही थी, ये भी तय था कि मैच वाले दिन भी बारिश होती रहेगी, भारत ने मैच के एक दिन पहले अपनी प्लेइंग इलेवन घोषित की, जिसमें तकरीबन वही सारे नाम थे, जो एक महीने पहले से कयास लगाये जा रहे थे, एक बैलेंस टीम, टीम प्रबंधन ने भी कहा कि ये ऐसी बैलेंस टीम है, जो दुनिया के किसी भी हिस्से में बेस्ट है, भारतीय टीम से यहीं गलती हो गई, उसने जो टीम चुनी थी, वो कागज पर तो परफेक्ट थी, लेकिन मौसम और पिच के लिहाज से नहीं।

बादल छाये रहेंगे
मौसम विभाग की ओर से कहा गया था कि मैच में अधिकतर समय बादल छाये रहेंगे, ऐसे में प्लेइंग इलेवन चुनते समय दो बातें साफ थी, पहली मैच में तेज गेंदबाजों का दबदबा रहेगा, खासकर स्विंग गेंदबाजों का, दूसरी मैच में बड़ा स्कोर बनने की संभावना ना के बराबर थी, ऐसे में बल्लेबाजी पर भी फोकस करना जरुरी था, भारत ने दूसरी बात का ध्यान तो पूरा रखा, लेकिन पहली बात नजरअंदाज कर दिया, मैच में साफ दिखा कि भारत को मैच में चौथे तेज गेंदबाज की कमी बुरी तरह खली।

गेंदबाज को मौका
टीम इंडिया अश्विन या जडेजा को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखकर एक और तेज गेंदबाज चुन सकता है, इसका जवाब आसान नहीं है, दरअसल टीम इंडिया अगर जडेजा या अश्विन को प्लेइंग इलेवन से बाहर करती, TEam India 2 तो उनके विकल्प के तौर पर उमेश यादव या मोहम्मद सिराज को शामिल किया जा सकता था, लेकिन टीम में चौथे तेज गेंदबाज को शामिल करने से ज्यादा कठिन फैसला अश्विन या जडेजा में से किसी एक को बाहर करने का था।

अच्छे फॉर्म में
अश्विन पिछले कुछ समय से शानदार फॉर्म में हैं, उन्होने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अच्छी बल्लेबाजी भी की थी, दूसरी ओर जडेजा इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक हैं, हर प्रारुप में फिट हैं, वो गेंदबाजी में भले ही ज्यादा असरदार नहीं हैं, लेकिन उसकी भरपाई बल्लेबाजी और फील्डिंग से करते हैं, टीम प्रबंधन इन दोनों क्रिकेटरों में से किसी एक को चुनने में ही उलझ गई, ऐसे में शायद संतुलन का तर्क दिया गया होगा, लेकिन क्रिकेट जानने वालों के लिये ये समझना मुश्किल नहीं कि जिस माहौल और पिच में फाइनल खेला गया, उसमें दो स्पिनरों के साथ उतरना बड़ी गलती थी।

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