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अगर कोई टीम 347 का स्कोर भी बचा नहीं पाये, तो गेंदबाजों पर तो सवाल उठने लाजिमी हैं।

अगर कोई टीम 347 रन बनाये, लेकिन फिर भी विरोधी टीम आसानी से मैच जीत जाये, तो फिर पूरी टीम पर सवाल उठना लाजिमी है, हैमिल्टन में खेले गये पहले वनडे मुकाबले में कुछ ऐसा ही हुआ, भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट के नुकसान पर 347 रन बनाये, जवाब में मेजबान टीम ने आसानी से 11 गेंद पहले लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके बाद शर्मनाक हार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

खराब गेंदबाजी
अगर कोई टीम 347 का स्कोर भी बचा नहीं पाये, तो गेंदबाजों पर तो सवाल उठने लाजिमी हैं, टीम इंडिया के गेंदबाजों ने हैमिल्टन में बेहद खराब लाइन-लेग्थ से गेंदबाजी की, जिसका खामियाजा टीम को मैच हारकर चुकाना पड़ा। मोहम्मद शमी, शार्दुल ठाकुर, जसप्रीत बुमराह और कुलदीप यादव जैसे गेंदबाजों की धुनाई हुई, इसके साथ ही गेंदबाजों ने अतिरिक्त रन भी तोहफे में दिये, टीम के गेंदबाजों ने 24 वाइड गेंदें फेंकी, जो पिछले सात सालों में सबसे घटिया प्रदर्शन है, इससे पहले दक्षिण अफ्रीका में भारतीय गेंदबाजों ने सात साल पहले 20 से ज्यादा वाइड फेंकी थी।

खराब फील्डिंग
खराब गेंदबाजी के बाद दूसरी सबसे बड़ी वजह खराब फील्डिंग रही, खासकर मोहम्मद शमी और कुलदीप यादव ने विरोधी टीम को मौके दिये, कुलदीप ने इनफॉर्म बल्लेबाज रॉस टेलर का आसान सा कैच टपका दिया, 23वें ओवर में रविन्द्र जडेजा की गेंद पर कुलदीप ने बैकवर्ड स्क्वायर लेग पर टेलर का जीवन दान दे दिया, जिसका फायदा उठाकर उन्होने 73 गेंदों में ही शतक ठोंक दिया और टीम को जीता ले गये।

सैनी की जगह शार्दुल को मौका
इस हार की एक बड़ी वजह कप्तान विराट कोहली और टीम प्रबंधन की रणनीति भी मानी जा रही है, नवदीप सैनी के होने के बावजूद शार्दुल ठाकुर को मौका दिया गया, शार्दुल को मौका देने के पीछे ये सोच थी कि वो अच्छी बल्लेबाजी भी कर लेते हैं, हालांकि उन्होने गेंदबाजी में 9 ओवर में 80 रन दे दिये, जिसकी वजह से टीम इंडिया मुकाबले से बाहर हो गई। सैनी ने पिछले दो टी-20 में धारदार गेंदबाजी की थी, वो इस मुकाबले में बुमराह के साथ अटैक कर अंतर पैदा कर सकते थे।

टॉस हारना
कप्तान विराट कोहली ने हैमिल्टन में टॉस गंवाया, इसे भी एक वजह मानी जा रही है, दरअसल हैमिल्टन के सेडन पार्क पिच पर बाद में बल्लेबाजी करना आसान होता है, जैसे जैसे इस पिच पर खेल आगे बढता है, पिच पाटा होता जाता है, गेंदबाजों को कोई मदद नहीं मिलती और बल्लेबाजों को आसानी होती है।

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