एटीट्यूड की समस्या बताकर टीम से निकाला, रन बनाने पर भी हार्दिक पंड्या को टीम में नहीं लिया गया

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स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या ने बताया कि पापा को हार्ट अटैक आया, उनका ऑफिस जाना बंद हो गया, बड़े भाई क्रुणाल भी टीम से बाहर हो गये, मैं भी बाहर था, तब सबकुछ रुक गया था।

स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या मैदान पर अपने हरफनमौला खेल और बाहर मस्तमौला जीवनशैली के लिये पहचाने जाते हैं, लेकिन उन्होने ऐसा भी समय देखा है, जब रोजमर्रा की जरुरतों को पूरा करने के लिये भी उन्हें कई परेशानियां झेलनी पड़ी थी, उन्हें एटीट्यूड की समस्या की वजह से बड़ौदा अंडर 16 टीम से बाहर कर दिया गया था, इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए हार्दिक ने इस बात का खुलासा किया है।

पुरजोर संघर्ष किया
हार्दिक पंड्या ने कहा कि उन्होने और उनके परिवार ने बड़ौदा टीम में वापसी के लिये जोरदार संघर्ष किया, हार्दिक को टीम से निकाले जाने से पहले तक पंड्या परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था, हार्दिक को टीम से निकाले जाने के कुछ दिनों बाद ही उनके पिता हिमांशु पंड्या को हार्ट अटैक आया था, उनका काम धंधा भी छूट गया था, उस समय परिवार के लिये हार्दिक ही इकलौता कमाने वाले थे।

एटीट्यूड प्रॉब्लम की वजह से निकाला
हार्दिक ने बताया कि मुझे याद है कि मेरे कोच के साथ व्यवहार की वजह से मुझे अंडर 17 टीम से निकाला गया था, ये काफी हास्यास्पद था, मुझे याद है कि मेरे भाई से कहा गया कि मुझे एटीट्यूड प्रॉब्लम है, 16 साल की उम्र में मुझे पता भी नहीं था कि एटीट्यूड होता क्या है, ये हंसने वाली बात थी, किसी ने मुझे एटीट्यूड के बारे में बताया तो मैं टीम से बाहर हो गया, फिर पिता को हार्ट अटैक आया, वही कमाते थे, तब मुझे और क्रुणाल को अंडर 16 और अंडर 19 खेलने के लिये साल के 35 हजार रुपये मिलते थे।

मैंने पूछा हम ही क्यों
स्टार ऑलराउंडर ने बताया कि पापा को हार्ट अटैक आया, उनका ऑफिस जाना बंद हो गया, बड़े भाई क्रुणाल भी टीम से बाहर हो गये, मैं भी बाहर था, तब सबकुछ रुक गया था, 35 हजार रुपये जो एक दो महीने के लिये हमारी मदद कर सकते थे, वो भी नहीं मिल रहे थे, हम सामान्य परिवार से हैं, लेकिन चीजें अचानक बदली, मानसिक रुप से मैं इसे नहीं मान पाया, मैंने पूछा हम ही क्यों, तब मैंने फैसला लिया, कि मैं खेल में पूरी जान लगा दूंगा।

800 रन बनाये
हार्दिक ने बताया कि मैंने उस साल 800 रन बनाये थे, उस समय सबसे ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी था, लेकिन चयनकर्ता पसंद नहीं करते थे, इसलिये मुझे नहीं चुना गया, टीम में नहीं चुने के बाद में मैदान पर गया और 17 राउंड लगाया, इस दौरान मेरी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे।

बात करना बंद कर दिया
स्टार क्रिकेटर ने बताया कि 17 से 19 साल की उम्र तक मैं पूरी तरह क्रिकेट में डूब गया, मैंने लोगों से बात करना बंद कर दिया, पूरी तरह से दुनिया से कट गया, अगले साल भी उन्होने मुझे नहीं चुना, फिर मुझे याद है कि अंडर 19 के असिस्टेंट कोच और कप्तान ने मुझे एक मौका देने की मांग की, इसके बाद चयनकर्ताओं ने मुझे मौका दिया, मुझे याद है कि उन्होने कहा था कि वो केवल एक मौका देंगे अगर मैं फेल हुआ, तो दोबारा मौका नहीं मिलेगा। आपको बता दें कि हार्दिक इस समय टीम इंडिया के नंबर वन ऑलराउंडर हैं, हालांकि चोट की वजह से टीम से बाहर हैं।

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