हर शनिवार को शनिदेव का उपवास रखें, सुबह स्नान के बाद पीपल के जड़ में जल चढाएं, शाम के पीपल के जड़ के पास तेल का दीपक जलाएं।

जब भी कोई ग्रह वक्री चाल चलते हुए किसी राशि के चक्कर लगाता है, तो उसे शुभ नहीं माना जाता है, मालूम हो कि जब कोई ग्रह उल्टी चाल चलने लगे, तो उसे वक्री चाल कहा जाता है, मई से शनि वक्री दिशा में अपनी चाल चलने लगेंगे, जिससे कई राशि के जातकों की परेशानियां बढने लगेगी, ऐसे में जिन राशियों पर साढेसाती और ढैय्या चल रही है, उनकी परेशानी बढने वाली है।

शनि का वक्री होना
ज्योतिषी के मुताबिक शनि 11 मई 2020 से अपनी चाल बदलेगा, शनि वक्री चाल से 142 दिनों तक मकर राशि के चक्कर लगाएगा, इसके बाद 29 सितंबर को शनि फिर से मार्गी अवस्था में आ जाएगा, जिसके बाद कुछ राशि के जातकों पर सीधा असर होगा।

इन पर अशुभ असर
शनि के वक्री होने का सबसे ज्यादा असर 5 राशियों के जातकों पर पड़ेगा। धनु, मकर और कुंभ राशियों पर शनि की साढेसाती चल रही है, इसके साथ ही दो राशि मिथुन और तुला पर भी शनि की ढैय्या चल रही है, ऐसे में शनि के वक्री होने पर इन पांच राशियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

क्या करें उपाय
हर शनिवार को शनिदेव का उपवास रखें।
सुबह स्नान के बाद पीपल के जड़ में जल चढाएं, शाम के पीपल के जड़ के पास तेल का दीपक जलाएं।
शनि के बीज मंत्र ऊँ प्रां प्रीं प्रौं शं श्नैश्चराय नमः का 108 बार जाप करें।
काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें
भिखारी या जरुरतमंद को भोजन करवाएं, या वस्त्र दान करें।

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