गढ़वाल का चमत्कारी मंदिर, जहां शेर चलकर आता है मां दुर्गा के दर्शन करने

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उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि, यहां देवताओं का वास है. इसी वजह से देवभूमि पर किसी की बुरी नजर नहीं लगती. यूं तो यहां सैकड़ों मंदिर हैं जिनकी अपनी अलग-अलग मान्यता है. पर पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार से महज 13 किमी की दूरी पर एक ऐसा मंदिर हैं. जहां माता रानी के दर्शन करने सिर्फ भक्त ही नहीं बल्कि उनकी सवारी शेर भी आता है. कहा जाता है कि, शेर मंदिर में माथा टेककर चले जाता है. किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता.

शेर आता है माता रानी के दर्शन करने
मां दुर्गा का ये चमत्कारी चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा है और नदी किनारे स्थित है. मंदिर देखने में छोटा है लेकिन, जो यहां आता है वह यहीं का हो जाता है.durga devi dugadda ऐसा इसलिए क्योंकि, मंदिर के पास ही नदी बहती है और जब मंदिर में दर्शन के लिए लोग जाते हैं तो कलकल बहता पानी और शुद्ध हवा लोगों का मन मोह लेती है. एक तरह से मां दुर्गा का ये मंदिर लोगों को प्रकृति के करीब होने का अहसास कराता है.

कब आता है शेर
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि, नवरात्र के दिनों में दुर्गा माता के दर्शन करने के लिए शेर आता है और उनका आशीर्वाद लेकर वापस लौट जाता है. लेकिन, किसी भी भक्त को वह नुकसान नहीं पहुंचाता. इस वजह से ये अपने आप में काफी खास और चमत्कारी मंदिर है.

कहा जाता है कि, सैलानी जब भी पहाड़ों पर घूमने आते हैं तो पहले दुर्गा देवी में माथा जरूर टेकते हैं. इसके बाद ही वह अपनी यात्रा शुरू करते हैं. मां दुर्गा की मूर्ति के साथ मंदिर के निचले हिस्से में एक छोटी सी गुफा जो काफी अंदर यानि जंगल की तरफ जाती है. गुफा के अंदर एक ज्योत हमेशा जलती रहती है. durga mandir dugaddaपर गुफा के भीतर जाने की अनुमति किसी को नहीं है. नवरात्र के दिनों में यहां माता रानी के भक्तों का तांता लगा रहता है. तो अगर आप भी माता रानी के दर्शन करना चाहते हैं और प्रकृति का शानदार अनुभव करना चाहते हैं. तो एक बार जरूर दुर्गा देवी मंदिर जाइए. मंदिर से 2 किमी आगे ही दुगड़्डा कस्बा है और वहीं से कुछ किलोमीटर की दूरी पर लैंसडाउन शहर बसता है.

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