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सावन के शनिवार को शंकर जी की पूजन करने से शनि की साढे साती और ढैय्या के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है, आइये जानते हैं सावन के शनिवार को किये जाने वाले उपाय।

ज्योतिषी के मुताबिक मकर, कुंभ और धनु राशि पर शनि का साढेसाती चल रही है, जबकि मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है, इनके अलावा जो भी व्यक्ति शनि की महादशा या अन्य किसी दुष्प्रभाव से ग्रस्त हैं, उनके लिये सावन का महीना एक सुअवसर है, सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा होती है, पौराणिक मान्यता के मुताबिक शनि देव स्वयं भगवान शिव के अराधक हैं, इसलिये सावन के शनिवार को शंकर जी की पूजन करने से शनि की साढे साती और ढैय्या के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है, आइये जानते हैं सावन के शनिवार को किये जाने वाले उपाय।

1.शनि की साढेसाती तथा ढैय्या से पीड़ित लोगों को सावन के शनिवार को शिवलिंग पर जल और काला तिल चढाना चाहिये, ऐसा करने से शनि के दुष्प्रभाव में कमी आती है। shani1
2.सावन के शनिवार के दिन शंकर जी के मंदिर में सरसों के तेल दीपक जलाकर शनि चालीसा का पाठ करने से शनि की महादशा से मुक्ति मिलती है।

3.सावन महीने में प्रत्येक शनिवार को शंकर जी के मंदिर में रुद्राक्ष की माला से शनिदेव के मंत्र का जाप करें, शनिदोष से मुक्ति मिलेगी।
4. हनुमान जी को भी रुद्रावतार माना जाता है, इनके पूजन तथा शनिवार को हनुमान जी को चोला चढाने से शनिदेव के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

5.सावन के शनिवार को काला कपड़ा, काला तिल, लोहा या सरसों के तेल का दान करने से शनिदेव खुश होते हैं।
6. सावन के शनिवार को काला या गहरे नीले रंग का वस्त्र पहन कर शंकर भगवान की पूजा करनी चाहिये, ऐसा करने से शनि की कुदृष्टि का प्रभाव नहीं पड़ता है।
7. सावन के शनिवार को गरीब व्यक्ति या असहाय को भोजन कराने तथा कपड़े दान करने से शनि की महादशा से मुक्ति मिलती है।

(डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी की पुष्टि हम नहीं करते हैं, ये मान्यताओं पर आधारित है, इस पर अमल करने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह लें)

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