shani sade sati

शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है. जिन लोगों पर शनि की कृपा होती है उनका जीवन बिना किसी बाधा के खुशी-खुशी बीतता है और इंसान रंक से राजा बन जाता है. लेकिन जिन पर शनि की नजर होती है उनका जीवन कष्टाकारी होता है. वो लोग चारों तरफ से मुसीबतों से घिर रहते हैं. मेहनत करने के बाद भी काम नहीं बनता. नौकरी से लेकर घर-परिवार में संकट के बादल मंडराने लगते हैं. वैसे तो हर व्यक्ति के जीवन में एक बार साढ़ेसाती अवश्य रूप से आती है. पर कुछ लोग उपाय कर लेते हैं और कुछ लोग समझ नहीं पाते. आज के इस लेख में जानेंगे शनिदोष के बारे में और उन तीन राशियों के बारे में जिन पर इस समय शनि की साढ़ेसाती चल रही है.

कब लगता है शनि दोष

जब शनि मेष राशि में होता है तो उसे नीच माना जाता है जबकि शत्रु राशि में जाने से इंसान पर शनि का दोष शुरू हो जाता है. जिस व्यक्ति पर शनि का दोष लगता है उसे शनिदेव परेशान करने लगते हैं. सूर्य और चंद्रमा के साथ युति बनाने पर भी शनिदोष होता है,

शनि साढ़ेसाती

शनि की साढ़ेसाती ज्योतिषियों के मुताबिक तब पैदा होती है जब चंद्र राशि से शनि 12वें, पहले और द्वितीय भाव में रहता है तो उसी अवधि को साढ़ेसाती कहते हैं.

 शनि की टेढ़ी नजर

शनि देव हर किसी के साथ न्याय करते हैं इसलिए जो भी व्यक्ति गरीबों और जरूरतमंद लोगों को परेशान करता है और बुरे कर्म करता है उनको शनिदेव वैसा ही फल देते हैं. पर जो लोग गरीबों की मदद करते हैं और हमेशा अच्छे कर्म करते हैं उनसे शनिदेव प्रसन्न होते हैं.इन 3 राशियों पर साढ़ेसाती

ज्योतिषियों के मुताबिक, कुंडली में शनि की महादशा 19 सालों की होती है और शनि सारे ग्रहों में बहुत धीरे-धीरे चलते हैं इसी कारण समय बढ़ता है. इस समय धनु, मकर और कुंभ पर साढ़ेसाती चल रही है. चूंकि शनि एक ग्रह से दूसरे ग्रह में जाने के लिए ढाई साल का समय लेते हैं इसी वजह से एक राशि में साढ़ेसाती 7 साल की होती है.

3 चरणों में होती है साढ़ेसाती

जिस कुंडली पर शनि की साढ़ेसाती है उस व्यक्ति को तीन चरणों में दुख झेलने पड़ते हैं. पहला चरण सबसे ज्यादा कष्टकारी होता है और दूसरे चरण में आर्थिक दिक्कतें आती हैं जबकि तीसरे व आखिरी चरण में भी साढ़ेसाती का प्रभाव

बुरा ही रहता है. साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति का बनता काम भी बिगड़ने लगता है और जीवन कष्टों से भरा रहता है.
साढ़ेसाती और शनि ढैय्या उपाय

शनिवार के दिन करें पूजा

प्रतिदिन हनुमान चालीसा का कम से कम 3 बार पाठ करें. इससे बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलेगी.
महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए भगवान शिव की पूजा करें.
शनिवार के दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं.

शनिवार के दिन काला चना, सरसों का तेल, लोहे का सामान एवं काली वस्तुओं का दान करें,
सरसों या तिल के तेल शनि देव पर अर्पित करें और तेल की दीपक जलाएं.