बेटे को भगवा में देख चौंक गये थे पिता, योगी आदित्यनाथ ने घर वालों से छुपाई थी ये बात

0
1372

पिता को अचानक अपने सामने देखकर योगी भी हैरान रह गये थे, उन्होने भावनाओं को काबू करते हुए उन्हें अपने साथ मंदिर कार्यालय में ले गये, तब महंत अवैद्यनाथ कहीं बाहर गये थे।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह विष्ट का निधन हो गया है, दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होने आखिरी सांस ली, आज हम आपको सीएम योगी और उनके पिता के बारे में एक खास कहानी बताते हैं, जिसमें वो अपने बेटे को संन्यासी के रुप में देखकर हैरान रह गये थे। बात साल 1992 की है, जब योगी अपनी मां को गोरखपुर जाने की बात कहकर घर से चल दिये थे, तब उनकी मां ने सोचा था कि बेटा शायद नौकरी के लिये जा रहा है, लेकिन यहां कहानी तो कुछ और ही थी।

घर वालों को सूचना नहीं
आदित्यनाथ को अपने गांव पंचूर से गोरखपुर के लिये निकले 6 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका था, लेकिन उनके घर वालों को इस बारे में कोई सूचना नहीं थी, कि वो कौन सी नौकरी कर रहे हैं, किस जगह रह रहे हैं, इस बात को लेकर योगी के पिता परेशान हो गये, इस दौरान योगी की बड़ी बहन पुष्पा ने पिता को बताया कि गोरक्षनाथ मंदिर जाइये, वहां आपको पूरी सूचना मिल जाएगी।

अखबार में पढी थी खबर
दरअसल योगी की बहन पुष्पा शादी के बाद दिल्ली शिफ्ट हो गई थी, वहां उन्होने हिंदी अखबार में छोटी सी खबर पढी थी कि गोरखपुर सांसद और गोरक्षपीठाधीश्वर ने दो महीने पहले अपने उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा की है, वो योगी आदित्यनाथ हैं और पौड़ी के रहने वाले हैं। इस जानकारी के बाद आनंद सिंह विष्ट गोरखपुर के लिये चल दिये, वहां पहुंचते ही सीधे मंदिर पहुंचे, वहां देखा कि भगवा धारण किये सिर मुड़ाए एक युवा संन्यासी फर्श सफाई का मुआयना कर रहा था। वो शख्स उनका बेटा था, बेटे को संन्यासी के भेष में देखकर पिता अवाक रह गये, उन्होने इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी, उनके भीतर का पिता जाग उठा, उन्होने बेटे से पूछा कि ये क्या हाल बना रखा है, यहां से तुरंत घर चलो।

योगी रह गये हैरान
पिता को अचानक अपने सामने देखकर योगी भी हैरान रह गये थे, उन्होने भावनाओं को काबू करते हुए उन्हें अपने साथ मंदिर कार्यालय में ले गये, तब महंत अवैद्यनाथ कहीं बाहर गये थे, किसी ने फोन के माध्यम से अवैद्यनाथ जी को बताया कि योगी के पिता आये हैं। पीठाधीश्वर ने उनके पिता से बात की, कहा कि आपके पास 4 पुत्र है, एक को समाज सेवा के लिये नहीं दे सकते, उनके पास कोई जवाब नहीं था, उस समय उनका बेटा नहीं बल्कि उनके सामने योगी आदित्यनाथ दिखाई दे रहे थे, जिसके बाद आनंद सिंह विष्ट कुछ समय वहां बिताने के बाद अपने गांव पंचूर लौट गये।
साभार- ये कहानी सीएम योगी की जीवन यात्रा पर लिखी गई किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।