CAA-NRC के बाद अब NPR लाने की तैयारी में मोदी सरकार, जानिये क्या है ये बिल

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एनपीआर में हर नागरिक की जानकारी रखी जाएगी, ये नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को तहत स्थानीय, उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है।

सीएए और एनआरसी को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है, अब मोदी सरकार नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) लाने की तैयारी कर रही है, इसके तहत भारतीय नागरिकों को बायोमेट्रिक और वंशावली भी दर्ज किया जाएगा, रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और जनगणना आयुक्त विवेक जोशी ने हाल ही में बताया कि असम के अलावा पूरे देश में एनपीआर पर काम शुरु किया जाएगा, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के अंतर्गत 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 तक असम के अलावा देशभर में घर-घर जाकर मतगणना की जाएगी।

क्या है पूरी प्रक्रिया
एनपीआर में हर नागरिक की जानकारी रखी जाएगी, ये नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को तहत स्थानीय, उप जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है, कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे ज्यादा समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है, उसे एनपीआर में अनिवार्य रुप से पंजीकरण करना होता है।

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कैसे होगा सर्वे
एनपीआर में तीन प्रक्रिया होगी, पहले चरण यानी अगले साल 1 अप्रैल 2020 से लेकर 30 सितंबर के बीच केन्द्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़ें जुटाएंगे, वहीं दूसरे चरण को 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा किया जाएगा, तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च से 5 मार्च के बीच होगी।

क्या है उद्देश्य
एनपीआर का मुख्य उद्देश्य क्या है, सरकारी योजनाओं के अंतर्गत दिया जाने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और व्यक्ति की पहचान की जा सके, इसके लिये एनपीआर जरुरी है, साथ ही देश की सुरक्षा में सुधार किया जा सके और आतंकी गतिविधियों को रोकने में सहायता प्राप्त हो सके, इसके जरिये देश के सभी नागरिकों को एक साथ जोड़ा जा सकता है।

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