sourav ganguly shah

बंगाल की राजनीति में अभी भी ममता बनर्जी की अच्छी पकड़ मानी जाती है, ऐसे में विधानसभा चुनाव में ममता दीदी को टक्कर देने के लिये बीजेपी एक मास लीडर को ढूंढ रही है।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी एक ऐसे नेता को ढूंढ रही है, जिसका समाज के हर तबके में स्वीकार्यता हो, यही वजह है कि बीजेपी बंगाल में चर्चित हस्तियों को अपने साथ जोड़ने में लगी हुई है, इसी कड़ी में पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली के लिये बीजेपी एकदम मुफीद साबित हो सकती है, क्योंकि बतौर क्रिकेटर दादा ने बंगाल में जो लोकप्रियता हासिल की है, उसका कोई सानी नहीं है।

बीजेपी को झटका
हालांकि बीजेपी की इन कोशिशों को तब बड़ा झटका लगा, जब दादा ने फिलहाल राजनीति की पिच पर उतरने से मना कर दिया, टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सौरव गांगुली ने अपने फैसले से बीजेपी लीडरशिप को भी अवगत करा दिया है, उन्होने कहा कि वो अपनी क्रिकेट की जिम्मेदारियों को निभाने में व्यस्त हैं, और उसी में खुश हैं, बताया जा रहा है कि सौरव गांगुली ने बीजेपी के लिये विधानसभा चुनाव में प्रचार करने से भी इंकार कर दिया है। मालूम हो कि बीते दो साल में बीजेपी बंगाल में काफी मजबूत हुई है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने 2019 लोकसभा चुनाव में 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी, साथ ही वोट शेयर के मामले में भी सत्ताधारी टीएमसी से सिर्फ 3 फीसदी पीछे रही थी।

ममता बनर्जी की पकड़
हालांकि बंगाल की राजनीति में अभी भी ममता बनर्जी की अच्छी पकड़ मानी जाती है, ऐसे में विधानसभा चुनाव में ममता दीदी को टक्कर देने के लिये बीजेपी एक मास लीडर को ढूंढ रही है। अगर बंगाल में बीजेपी नेतृत्व की बात करें, तो फिलहाल दो नेता सबसे आगे हैं, पहले दिलीप घोष और दूसरे मुकुल रॉय, दिलीप घोष को आरएसएस का समर्थन है, लेकिन उनहें मिडिल और उच्च वर्ग के समाज का ज्यादा समर्थन नहीं मिलता है, वहीं मुकुल रॉय का इतिहास दागदार है, जो उन्हें मजबूत दावेदार बनने से रोकता है।

दमदार चेहरे की तलाश
यही वजह है कि बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहले किसी ऐसे चेहरे को सामने लाने में जुटी है, जिसकी स्वीकार्यता राज्य के सभी वर्गों में हो, जो लोकप्रियता में भी सीएम को टक्कर दे सके, बीजेपी भी ये बात अच्छे से जानती है, कि विधानसभा चुनाव में पीएम का चेहरा उतना कारगर नहीं रहेगा, उस चुनाव में स्थानीय नेतृत्व को लोग ज्यादा तरजीह देते हैं, हालांकि सौरव गांगुली के इंकार करने से लग रहा है कि बीजेपी की ये परेशानी फिलहाल हल नहीं होने वाली है।

Read Also – कभी मायावती के माने जाते थे दाहिने हाथ, बीजेपी ने राज्यसभा के लिये बनाया उम्मीदवार, बड़ा उलटफेर!