शरद पवार ने खोला राज, अजित पवार ने बीजेपी से क्यों मिलाया था हाथ?

एनसीपी चीफ शरद पवार ने बताया कि 22 नवंबर को एनसीपी और कांग्रेस के बीच बैठक चल रही थी, बैठक में दोनों पक्षों में काफी गरमागरमी हुई थी

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एनसीपी चीफ शरद पवार ने बताया कि 22 नवंबर को एनसीपी और कांग्रेस के बीच बैठक चल रही थी, बैठक में दोनों पक्षों में काफी गरमागरमी हुई थी।

महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार की बगावत अनायास नहीं थी, उऩके बागी होने से एक दिन पहले ही पूरी पटकथा लिखी गई थी, जिससे वो विचलित हो गये थे, जिसके बाद उन्होने बीजेपी से हाथ मिलाने का फैसला लिया, हालांकि देवेन्द्र फडण्वीस से उनकी बातचीत पहले से चल रही थी, इस बात की जानकारी उनके चाचा शरद पवार को भी थी, इस बात का खुलासा खुद पवार ने एक टीवी चैनल को दिये इंटरव्यू में किया है, हालांकि शरद पवार ने ये भी कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि अजित इतना बड़ा फैसला लेते हुए बीजेपी के साथ हाथ मिला लेंगे।

एनसीपी-कांग्रेस की बैठक
एनसीपी चीफ शरद पवार ने बताया कि 22 नवंबर को एनसीपी और कांग्रेस के बीच बैठक चल रही थी, बैठक में दोनों पक्षों में काफी गरमागरमी हुई थी, इससे अजित पवार असहज और नाखुश थे, उन्होने मेरे सहयोगी से कहा कि मैं नहीं समझ पा रहा, कि कांग्रेस के साथ गठबंधन कैसे काम करेगा, इसके बाद अजित बीच बैठक में ही निकल गये, इस बात का जिक्र शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी अपनी प्रेस कांफ्रेंस में की थी।

नजरें नहीं मिला पा रहे थे
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा था कि ये महाशय (अजित पवार) रात तक बैठकों में हमारे साथ थे, लेकिन नजरें नहीं मिला पा रहे थे, जिसकी नजर में खोट होता है, वो नजरें नहीं मिला पाता, राउत ने कहा कि अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार को धोखा दिया, ये ना सिर्फ शरद पवार के साथ धोखा है, बल्कि महाराष्ट्र की जनता के साथ धोखा है, शिवाजी की धरती के साथ धोखा है, अजित पवार और उनका साथ देने वाले विधायकों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों से छल किया है।

हैरान रह गया
शरद पवार ने बताया कि 23 नवंबर की सुबह जब अजित पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ लेते देखा, तो हैरान रह गया, हालांकि शरद पवार का भतीजे के प्रति अभी भी नरम रुख है, जब उनसे अजित पवार के रोल के बारे में पूछा गया, तो उन्होने कहा कि अजित एनसीपी के वरिष्ठ नेता हैं, विधानसभा के शीत कालीन सत्र के बाद उन पर पार्टी फैसला लेगी, मैं ये नहीं कह सकता कि वो डिप्टी सीएम होंगे या नहीं, इसके लिये सहयोगियों से चर्चा करनी होगी, लेकिन उनके प्रति पार्टी के सदस्यों में पूरा सम्मान है, भले ही उनके बीजेपी के साथ जाने से वो नाखुश रहे हों।

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