Sunday, April 18, 2021

डॉक्टरी की पढाई के बाद सिर्फ 24 साल में बनी सरपंच, विकास का मॉडल बटोर रहा सु्र्खियां!

शाहनाज खान राजस्थान के एक गांव से ताल्लुक रखती है, वो गांव की सरपंच बनी है, हाल ही में उनके गांव में सरपंच के लिये उपचुनाव हुआ था।

आज के दौर में महिलाएं पुरुषों के कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं, समाज की दिशा और दशा दोनों को सुधारने में महिलाएं बड़ी भूमिका निभा रही हैं, वो सिर्फ घर ही नहीं संभालती, बल्कि जरुरत पड़ने पर घर के बाहर गांव और देश को भी विकसित करने की कोशिश करती हैं, शहर में पली-बढी, या पढने वाले लड़कियों के बारे में तो आपने खूब पढा और सुना होगा, आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताते हैं, जिसने डॉक्टरी की पढाई करके गांव की सरपंच बनी, अब गांव के लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा करने के लिये काम कर रही है, इस लड़की का नाम शहनाज खान है।

राजस्थान से ताल्लुक
शाहनाज खान राजस्थान के एक गांव से ताल्लुक रखती है, वो गांव की सरपंच बनी है, हाल ही में उनके गांव में सरपंच के लिये उपचुनाव हुआ था, जिसमें शहनाज ने अपने विरोधी को 195 वोटों से हराया है। शहनाज ने एमबीबीएस किया है, उनका लालन-पालन भी शहर में हुआ है, वो गांव के बारे में कम जानती हैं, लेकिन अब वो पूरे गांव को बदलने में लगी हुई है।

पढाई जारी रख जिम्मेदारी निभा रही
मेवात ऐसा इलाका माना जाता है, जहां लड़कियों को घर से बाहर यहां तक कि पढाई के लिये नहीं भेजा जाता, क्योंकि वहां अपराध अधिक मामले में होते हैं, वहां शहनाज ने जो कर दिखाया है, वो सच में आश्चर्यजनक है, वो एक पढी लिखी लड़की होने के साथ-साथ गांव की जिम्मेवारी संभालने में तत्पर रही हैं, वो अपने पद को संभालते हुए अपनी शिक्षा को भी आगे बढा रही हैं।

लड़कियों की शिक्षा के लिये करेगी काम
शहनाज सबसे पहले अपने क्षेत्र में शिक्षा पर काम कर रही हैं, उनका कहना है कि पहले बेटी पढाओ और बेटी बचाओ जैसे नारे के महत्व को समझाकर लोगों को इसके लिये तैयार करुंगी, ताकि वो सभी समझ पाए, कि बेटी और उसके लिये शिक्षा कितनी जरुरी है, उनका मानना है कि हरियाणा, राजस्थान या फिर यूपी के गांव वाले क्षेत्रों में ज्यादातर राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षणिक मामले में ये सारे राज्य पीछे हैं, मैं इसके पिछड़ेपन को दूर कर इसे विकसित करना चाहती हूं, ताकि यहां सभी इस बातों के महत्व को समझ पाएं, उन्होने ये भी कहा कि हमारे लिये सड़क, बिजली और पानी मुख्य जरुरत हैं, साथ ही हमें स्वास्थ्य के बारे में भी ज्यादा ध्यान देना है, लेकिन शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है, इससे जिंदगियां बदलेगी।

दादाजी भी थे सरपंच
शहनाज ने ये फैसला क्यों लिया, कि वो सरपंच बनेगी, इस बारे में उन्होने बताया कि मेरे दादाजी इस गांव के सरपंच रह चुके हैं, लेकिन किसी कारणवश 2017 में उनहें निर्वाचन क्षेत्र के लिये स्थान नहीं मिला, और उनकी याचिका खारिज कर दी गई, तब उनके परिवार और गांव वालों ने चुनाव के बारे में बातें शुरु की, इसी दौरान सबने बोला कि क्यों ना मुझे सरपंच पद के लिये खड़ा कर दिया जाए।

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