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सचिन पायलट की शुरुआती पढाई दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से हुई, इसके बाद उन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।

राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट आज अपना 44वां जन्मदिन मना रहे हैं, वो चर्चित राजनीतिक हस्ती रहे राजेश पायलट के बेटे हैं, फिलहाल वो राजस्थान के टोंक विधानसभा सीट से विधायक हैं, वो राजस्थान सरकार में डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं, इसके साथ ही मनमोहन सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं, आइये उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनकी पढाई से लेकर लव स्टोरी तक के बारे में बताते हैं।

दिल्ली से शुरुआत
सचिन पायलट की शुरुआती पढाई दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से हुई, इसके बाद उन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया, sara sachin बीबीसी को दिये एक इंटरव्यू में उन्होने बताया था कि सेंट स्टीफेंस से पढाई पूरी करने के बाद उन्होने गुरुग्राम स्थित एक मल्टी नेशनल कंपनी में ढाई-तीन साल नौकरी भी की, हालांकि इसके बाद आगे की पढाई के लिये विदेश चले गये।

सारा अब्दुल्ला से मुलाकात
विदेश में पढाई के दौरान ही सचिन की मुलाकात सारा अब्दुल्ला से हुई, धीरे-धीरे उनकी दोस्ती हुई, जो प्यार में बदल गई, सारा पूर्व सीएम फारुक अब्दुल्ला की बेटी है। पढाई पूरी करने के बाद सचिन वापस देश लौट गये, जबकि सारा विदेश में ही रही, हालांकि इसके बाद भी दोनों का प्यार कम नहीं हुआ, दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहे, फिर हिम्मत जुटाकर अपने घर वालों को रिश्ते के बारे में बताया, लेकिन उनके प्यार के बीच मजहब की दीवार आकर खड़ी हो गई, सचिन हिंदू परिवार से थे, तो सारा मुस्लिम थी।

परिवार में विरोध
सचिन और सारा दोनों के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया, कहा जाता है कि फारुक अब्दुल्ला ने तो सारा से इस बारे में बात करने से ही मना कर दिया था, सारा कई दिनों तक रोती रहीं, और अपने पिता को मनाने की कोशिश करती रही, लेकिन फिर भी पिता नहीं माने। आखिरकार 2004 में दोनों ने शादी कर ली, जिसमें सचिन का परिवार शामिल हुआ था, लेकिन अब्दुल्ला परिवार की ओर से कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ था, हालांकि समय के साथ अब्दुल्ला परिवार ने भी सचिन पायलट को अपना दामाद कबूल कर लिया। सचिन पायलट ने जब राजनीति में कदम रखा, तो उनकी उम्र सिर्फ 26 साल थी, दरअसल उनके पिता की आकस्मिक निधन के बाद ऐसी परिस्थितियां बनी, कि उन्हें राजनीति में आना पड़ा, कहा जाता है कि सचिन जब मनमोहन सरकार में मंत्री बने, तो अब्दुल्ला परिवार ने उन्हें अपना दामाद कबूल कर लिया।

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