प्रशांत किशोर छोड़ देंगे नीतीश का साथ? विरोधी खेमे से मिला ऑफर, जदयू में खलबली

0
104
Loading...

प्रशांत किशोर ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था, नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करने से पहले जदयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिये।

नागरिकता संशोधन बिल संसद में पास हो चुका है, लेकिन इस पर सियासत जारी है, खासतौर से बिहार की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर नई संभावनाओं की तलाश शुरु हो चुकी है, बीजेपी की सहयोगी जदयू ने इस बिल का खुला समर्थन किया, लेकिन जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, इसे लेकर नीतीश कुमार की पार्टी में काफी उथल-पुथल मच चुका है, बताया जा रहा है कि पीके के साथ कुछ और नेता इसका खुला विरोध कर रहे हैं, पीके के तेवरों को देखकर महागठबंधन ने उन्हें नया ऑफर दिया है।

महागठबंधन में स्वागत
पूर्व केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने प्रशांत किशोर को खुला ऑफर देते हुए कहा कि वो जदयू का पद त्याग कर महागठबंधन में आ जाएं, रालोसपा के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने कहा कि अगर पीके आएंगे, तो हम सब लोग उनका स्वागत करेंगे।

महागठबंधन में मिलेगा सम्मान
माधव आनंद ने कहा कि मेरी भी प्रशांत किशोर से काफी अच्छे संबंध हैं, मैं भी उनसे बात करुंगा, उन्होने कहा कि पीके प्रसिद्ध रणनीतिकार हैं, स्वाभाविक है कि अगर वो हमें रणनीति बनाने में मदद करते हैं, और महागठबंधन की तरफ आएंगे, तो उन्हें पूरा मान-सम्मान मिलेगा, ये बिहार के लिये भी अच्छा होगा।

पीके ने उठाये वाजिब सवाल
इतना ही नहीं रालोसपा महासचिव ने कहा कि प्रशांत किशोर ने वाजिब सवाल उठाये हैं, आखिर नीतीश कुमार किन लोगों के आधार पर सत्ता में आये थे, किन लोगों ने उन्हें वोट किया था, आज उन्हीं के साथ धोखा कर रहे हैं, आपको बता दें कि बुधवार को भी प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार पर तंज कसा था।

पीके ने उठाये थे सवाल
प्रशांत किशोर ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था, नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करने से पहले जदयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिये, जिन्होने साल 2015 में उन पर भरोसा और विश्वास जताया था, हमें ये नहीं भूलना चाहिये, कि 2015 की जीत के लिये पार्टी और उसके प्रबंधकों के पास जीत के बहुत सारे रास्ते नहीं बचे थे।

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here