ramvilas sanjay

राम विलास पासवान ने कहा ऐ संजय गांधी, हम 1969 में विधायक बने थे, अब दूसरी बार लोकसभा में आया हूं, इसलिये मुझसे तमीज से बात करो, मैं बेलछी में नहीं बल्कि देश की संसद में बोल रहा हूं।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे और राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी ने कम उम्र में ही राजनीति में जबरदस्त पैठ बना ली थी, वो कांग्रेस पार्टी में ना सिर्फ दमदार नेता माने जाते थे, बल्कि विपक्ष के लिये एक खौफ भी थे, देश के राजनीतिक परिदृश्य में कई ऐसी घटनाएं हुई, जिसमें संजय गांधी का नाम सीधे-सीधे आया, वो स्वाभाव से बहुत आक्रामक थे, लेकिन कई बार उनका ये आक्रामक रवैया उनके लिये मुसीबत बज जाता था।

आपातकाल के लिये जिम्मेदार
देश में आपातकाल लगाये जाने के लिये संजय गांधी को ही जिम्मेदार माना जाता है, उन्होने ही मारुति कार उद्योग की स्थापना की थी, 1977 में कांग्रेस की हार के पीछे भी उन्हें ही वजह बताया जाता है, साथ ही 1980 में कांग्रेस की सत्ता वापसी करवाने में भी उनका किरदार बताया जाता है, एक बार संसद के भीतर उनकी तत्कालीन लोकदल के वरिष्ठ नेता रामविलास पासवान से विवाद हो गया, 1980 के बजट सत्र के पहले दिन ही पासवान सदन में बोल रहे थे, इसी दौरान पहली बार सांसद बने संजय गांधी ने व्यंग्यात्मक लहजे में लोकसभा चुनाव में विपक्ष की करारी हार को लेकर कुछ कहा, इस पर रामविलास पासवान ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी।

क्या कहा पासवान ने
राम विलास पासवान ने कहा ऐ संजय गांधी, हम 1969 में विधायक बने थे, अब दूसरी बार लोकसभा में आया हूं, इसलिये मुझसे तमीज से बात करो, मैं बेलछी में नहीं बल्कि देश की संसद में बोल रहा हूं और यहां रंगबाजी नहीं चलेगी,  और अगर रंगबाजी ही करनी है, तो बताओ कहां फरियाना है, चांदनी चौक में या कनाट प्लेस में, इस पर मामला गरम हो गया और स्थिति बिगड़ने लगी।

इंदिरा ने किया बीच बचाव
तब सदन में इंदिरा गाधी बीच बचाव के लिये आगे आई, उन्होने रामविलास पासवान से कहा, रामविलास जी आप वरिष्ठ हैं, इसलिये संजय गांधी को माफ कर दीजिए, संजय तो न्यूकमर है, sonia Indira उसे अभी संसदीय परंपराओं के बारे में बहुत कुछ सीखना है, इसके बाद लंच के दौरान इंदिरा ने संजय और पासवान को आपस में मिलवाया और दोनों पक्षों का एक-दूसरे के प्रति गुस्सा खत्म कराया, संजय गांधी राजनीति में तेजी से उठे थे, लेकिन दुर्भाग्य से जल्दी ही दुनिया से विदा हो गये, 23 जून 1980 को एक विमान हादसे में उनका निधन हो गया।

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