Friday, April 23, 2021

प्रणब दा ने गिनाई सोनिया गांधी की गलतियां, कहा कांग्रेस की दुर्गति के लिये जिम्मेदार

प्रणब मुखर्जी ने 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार पर कहा कि उस दौरान पार्टी की हार की एक मुख्य वजह ये थी कि वो लोगों की उम्मीद तथा आकांक्षाओं को पूरी करने में असफल रही थी।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति तथा एक दौर में कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे प्रणब मुखर्जी का पिछले साल ब्रेन सर्जरी के बाद निधन हो गया था, हालांकि आखिरी समय में उन्होने अपने संस्मरण को पूरा किया था, अब उनकी किताब द प्रेजिडेंशियल ईयर्स के कुछ अंश सामने आये हैं, जिसकी जबरदस्त चर्चा हो रही है, इसमें उन्होने बीजेपी से लेकर कांग्रेस तथा पीएम मोदी से लेकर अरविंद केजरीवाल तक के बारे में बात की है, हालांकि उनकी किताब में सबसे चौंकाने वाला जिक्रा है कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेकर, जिन पर प्रणब दा ने कुछ खराब फैसले लेने का आरोप लगाया है।

क्या कहा प्रणब मुखर्जी ने
प्रणब मुखर्जी ने 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार पर कहा कि उस दौरान पार्टी की हार की एक मुख्य वजह ये थी कि वो लोगों की उम्मीद तथा आकांक्षाओं को पूरी करने में असफल रही थी, मुखर्जी ने बिना नाम लिये कहा कि कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक अनुभवहीनता तथा घमंड ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया।

पार्टी नेतृत्व पर सवाल
प्रणब दा ने संस्मरण में लिखा है, मुझे लगता है कि संकट के समय पार्टी नेतृत्व को अलग दृष्टिकोण से आगे आना चाहिये था, अगर मैं सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर काम जारी रखता, तो मैं गठबंधन में ममता बनर्जी का रहना सुनिश्चित करता, इसी तरह महाराष्ट्र को भी बुरी तरह संभाला गया, इसकी एक वजह सोनिया गांधी की ओर से लिये गये फैसले भी थे, मैं प्रदेश में विलासराव देशमुख जैसे मजबूत नेता की कमी के चलते शिवराज पाटिल या सुशील कुमार शिंदे को वापस लाता।

कांग्रेस को ऐसी मार ना पड़ती
पूर्व राष्ट्रपति ने लिखा, मुझे नहीं लगता कि मैं तेलंगाना राज्य के गठन को मंजूरी देता, मुझे पूरा भरोसा है कि सक्रिय राजनीति में मेरी मौजूदगी से ये सुनिश्चित हो जाता, कि कांग्रेस को वैसी मार ना पड़ती, जैसी उसे 2014 लोकसभा चुनाव में झेलनी पड़ी। प्रणब दा की किताब को लेकर उनके बेटे तथा बेटी में टकराव देखने को मिला है, दरअसल पूर्व राष्ट्रपति के बेटे-बेटी पिछले महीने ही ट्विटर पर उनकी किताब के प्रकाशन को लेकर आपस में भिड़ गये, अभिजीत मुखर्जी ने कहा कि उनके पिता की किताब को उनकी मर्जी के बिना ना छापा जाए, वहीं शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि कोई सस्ती लोकप्रियता के लिये उनके पिता की किताब को छपने से ना रोके, ऐसा करना पूर्व राष्ट्रपति का अपमान होगा।

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