प्रशांत किशोर के करीबी ने कहा कि पार्टी प्लेटफॉर्म पर इस बिल को लेकर किसी भी नेता से राय नहीं ली गई, सीधे संसद के दोनों सदनों में समर्थन का फैसला लिया गया।

नागरिकता संशोधन बिल के पास हो जाने के बाद भी जदयू में कोहराम थमता नहीं दिख रहा है, चुनावी रणनीतिकार और जदयू उपाध्यक्ष पीके ने नया ट्वीट कर बवाल मचा दिया है, प्रशांत किशोर ने लिखा है कि भारत की आत्मा को बचाने का काम अब 16 गैर बीजेपी शासित राज्यों पर है, क्योंकि लागू बिल को अमल में राज्यों को लाना है, पीके ने ये भी लिखा है कि पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल ने नागरिकता संशोधन बिल को ना कहा है, अब बाकी राज्यों को अपना रुख स्पष्ट करना है।

बीजेपी की पिछलग्गू बनी जदयू
सवाल ये उठ रहा है कि आखिरी पीके नागरिकता संशोधन कानून पर पार्टी से क्या चाहते हैं, एक निजी न्यूज चैनल से बात करते हुए पीके के करीबी का दावा है कि प्रशांत किशोर जानना चाहते हैं कि क्या जनता दल यूनाइटेड नेतृत्व बीजेपी की पिछलग्गू बन गई है।

पार्टी नेताओं से राय नहीं ली गई
पीके के करीबी ने कहा कि पार्टी प्लेटफॉर्म पर इस बिल को लेकर किसी भी नेता से राय नहीं ली गई, सीधे संसद के दोनों सदनों में समर्थन का फैसला लिया गया, प्रशांत किशोर का ये भी मानना है कि इससे पहले जदयू ने इस बिल का विरोध किया था, लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया, कि बिना किसी से बात किये पार्टी ने इसके समर्थन का फैसला लिया।

पहले किया था विरोध
सबसे पहले नागरिकता बिल का विरोध जदयू राज्यसभा सांसद हरिवंश ने किया था, इसके बाद जदयू कार्यकारिणी बैठक में खुद नीतीश कुमार ने इसका विरोध किया और पार्टी के नेताओं को बताया था कि ये बिल कैसे असंवैधानिक है, इसके बाद जदयू के पदाधिकारियों की बैठक में भी सुशासन बाबू ने इसका जमकर विरोध किया और पार्टी नेताओं को इसके खतरनाक पक्ष के बारे में बताया, जनवरी 2019 में संसद में इस बिल को लाया गया, तब भी नीतीश की पार्टी ने विरोध किया था।

पार्टी छोड़ेंगे पीके या नीतीश करेंगे कार्रवाई
पीके के रुख से लग रहा है कि वो आर-पार के मूड में हैं, ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या प्रशांत नीतीश की पार्टी छोड़ेंगे या सुशासन बाबू उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे, क्योंकि पीके लगातार ट्विटर के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, हालांकि फिलहाल की परिस्थिति देख ऐसा नहीं लग रहा कि नीतीश पीके के खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे, क्योंकि प्रशांत ही नहीं बल्कि पार्टी के कई बड़े नेता इसके खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। नीतीश ने पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है।

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