2 रुपये में चावल, 5 में दाल… अब संसद में भी नहीं मिलेगा सस्ता खाना, पढिये पूरी खबर

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संसद भवन में एक कैंटीन मीडिया के लिये तो एक सिर्फ सांसदों के लिये आरक्षित है, इसमें दूसरे लोगों को एंट्री नहीं मिलती है।

महंगाई के मुद्दे पर घिरी मोदी सरकार ने देश की संसद में सांसदों, आगंतुकों और पत्रकारों के लिये बनी कैंटीन पर बड़ा फैसला लिया है, अब संसद की कैंटीन में सब्सिडी नहीं मिलेगी, इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने मिलकर एक साथ फैसला लिया है, कि कैंटीन में सब्सिडी बंद की जाए, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार का सलाना 17 करोड़ रुपये संसद कैंटीन की सब्सिडी में खर्च होता था।

सभी ने मिलकर लिया फैसला
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर ये तय किया है, कि संसद की कैंटीन में मिलने वाले खाने पर सब्सिडी खत्म की जाए, इस फैसले के बाद कैंटीन में अब खाने के दाम लागत के हिसाब से तय किया जाएगा, आपको बता दें कि पिछली लोकसभा में भी कैंटीन के खाने के दाम बढाये गये थे, ताकि सब्सिडी का बिल कम किया जा सके, लेकिन अब इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।

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मिलने वालों को मिलता था सस्ता खाना
संसद भवन में एक कैंटीन मीडिया के लिये तो एक सिर्फ सांसदों के लिये आरक्षित है, इसमें दूसरे लोगों को एंट्री नहीं मिलती है, एक आंकड़े के अनुसार जब संसद चल रही होती है, तो यहां खाने वालों में सिर्फ 9 फीसदी संख्या ही सांसदों की होती है, इसके अलावा तीन फीसदी पत्रकार यहां की सेवा लेते हैं, बाकी इस कैंटीन की सेवा सांसदों के रहने वाले लोग और उनसे मुलाकात के लिये आने वाले लोग उठाते हैं। संसद के भीतर कैटरिंग की जिम्मेदारी रेलवे संभालती है।

सब्सिडी पर अब तक कितना खर्च
आरटीआई के जरिये दिये गये ब्योरे के अनुसार साल 2012-13 से साल 2016-17 तक संसद कैंटीनों को कुल 73,85,62,474 रुपये बतौर सब्सिडी दिये गये, अगर बीते पांच साल की स्थिति पर गौर करें, तो पता चलता है कि साल 2012-13 में सांसदों को सस्ते भोजन पर 12,52,01,867 रुपये सब्सिडी के तौर पर दिये गये।

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