ओवैसी ने बताया क्या है NRC और NPR में अंतर, जिसे हर भारतीय को जानना जरुरी है

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ओवैसी ने लिखा, एनपीआर भारत में रहने वाले सभी सामान्य निवासियों का इकट्ठा किया गया आंकड़ा है।

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध तो जाहिर किया, साथ ही सोशल मीडिया के जरिये ये भी समझाया कि आखिर एनआरसी और एनपीआर में क्या अंतर है, उन्होने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर करीब 5 ट्वीट्स किये हैं, जिसमें उन्होने विस्तृत रुप से बताया कि आखिर हर भारतीय को इसके बारे में क्यों जानकारी रखनी चाहिये, ओवैसी ने अपने पहले ट्वीट में लिखा, एनपीआर भारतीय नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी (रजिस्टर) की ओर पहला कदम है, जो राष्ट्रव्यापी एनआरसी का ही दूसरा नाम है, एनपीआर और एनआरसी के बीच ताल्लुक को समझना जरुरी है।

एनपीआर का मतलब
ओवैसी ने लिखा, एनपीआर भारत में रहने वाले सभी सामान्य निवासियों का इकट्ठा किया गया आंकड़ा है, साल 2003 के नागरिकता नियमों के अनुसार नागरिकों को गैर नागरिकों से अलग करने के बाद भारतीय नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी पेश की जानी है, ये छंटनी कैसे की जाती है।

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संदिग्धों को नागरिकता सिद्ध करनी होगी
इसके बाद ओवैसी ने लिखा सबसे पहले एक स्थानीय अधिकारी सूची की पुष्टि करता है, फिर स्थानीय नागरिकों की सूची में से संदिग्ध नागरिकों को नोटिस जारी किया जाता है, इन संदिग्धों को अपनी नागरिकता सिद्ध करनी होगी, इसके बाद ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की जाती है, अगर आपको लगता है कि ड्राफ्ट सूची में नाम आ जाना पर्याप्त है, तो ये सही नहीं है, क्योंकि नियमों के अनुसार किसी नाम के शामिल किये जाने पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है, मोटे तौर पर कोई भी आपत्ति दर्ज करवा सकता है, आपकी भारतीयता का फैसला एक अधिकारी के हाथ में है।

पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी
अपने आखिरी ट्वीट में ओवैसी ने लिखा, एनपीआर में हर भारतीय की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी भी जुटाई जाती है, जैसे पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी (कुल 5.5 प्रतिशत भारतीयों के पास पासपोर्ट हैं), आपको बता दें कि एनपीआर को मोदी सरकार ने मंजूरी दे दी है, 1 अप्रैल 2020 से इस पर काम शुरु होगा।

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