Sunday, April 18, 2021

अब्बास-ओवैसी की जोड़ी से बढी ममता बनर्जी की मुश्किलें, 100 सीटों पर सीधा असर!

31 फीसदी वोट शेयर के साथ पश्चिम बंगाल में मुसलमान किंगमेकर की भूमिका में रहते हैं, 2011 चुनाव में ममता बनर्जी की जीत के पीछे यही वोटबैंक था।

बंगाल विधानसभा चुनाव में सिर्फ तीन महीने बचे हैं, इस चुनाव में जहां अभी तक बीजेपी तथा टीएमसी के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही थी, वहीं रविवार को बंगाल में ओवैसी की एंट्री की घोषणा से मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है, दरअसल ओवैसी अकेले नहीं बल्कि प्रभावशाली फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के साथ चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, अब्बास सिद्दीका के चुनाव में उतरने से सीधा नुकसान ममता के लिये माना जा रहा है।

किंगमेकर की भूमिका में मुस्लिम वोटर्स
31 फीसदी वोट शेयर के साथ पश्चिम बंगाल में मुसलमान किंगमेकर की भूमिका में रहते हैं, 2011 चुनाव में ममता बनर्जी की जीत के पीछे यही वोटबैंक था, राज्य की 294 सीटों में से 90 से ज्यादा सीटों पर इस वोटबैंक का सीधा असर है, लेकिन फुरफुरा शरीफ दरगाह के चुनाव में उतरने से ममता बनर्जी के इस किले में सेंध लगने की पूरी संभावना है, अगर ऐसा हुआ तो ममता के लिये राह आसान नहीं रहने वाला है।

ममता बनर्जी को मिलता रहा है फायदा
ओवैसी ने रविवार को फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से मुलाकात की, उन्होने कहा कि अब्बास सिद्दीकी का हमें पूरा समर्थन प्राप्त है, वो जो फैसला लेंगे, हमें मंजूर होगा, बंगाल के हुगली जिले में फुरफुरा शरीफ चर्चित दरगाह है, दक्षिण बंगाल में इस दरगाह का विशेष दखल है, लेफ्ट फ्रंट सरकार के दौरान इसी दरगाह की मदद से ममता बनर्जी ने सिंगूर तथा नंदीग्राम जैसे दो बड़े आंदोलन किये थे।

ओवैसी ने उठाया फायदा
आपको बता दें कि फुरफुरा शरीफ के 38 वर्षीय पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ममता के मुखर समर्थक थे, लेकिन बीते कुछ महीनों से उन्होने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वो ममता सरकार पर मुस्लिमों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं, जिसका फायदा ओवैसी ने उठाया है, बंगाल की करीब 100 सीटों पर इस दरगाह का प्रभाव है।

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