कुमार विश्वास ने इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला भी ले लिया था, लेकिन उन्होने पढाई बीच में ही छोड़ दी, फिर उन्होने ग्रेजुएशऩ किया।

हिंदी के रॉकस्टार कवि डॉ. कुमार विश्वास आज अपना 50 वां जन्मदिन मना रहे हैं, 10 फरवरी 1970 को पैदा हुए कुमार विश्वास अपनी कविताओं के साथ -साथ राजनीतिक बयानबाजी के लिये भी चर्चा में बने रहते हैं, कुमार का जितना क्रेज युवाओं में हैं, उतना ही प्यार और स्नेह बड़ों से भी मिलता रहा है, उनके जन्मदिन के खास मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं, कैसे यूपी के एक छोटे से कस्बे पिलखुवा का लड़का गूगल हेडक्वार्टर तक पहुंचा।

बचपन
कुमार विश्वास का बपचन हापुड़ जिले के पिलखुवा कस्बे में गुजरा, पिता चंद्रपाल शर्मा प्रोफेसर थे और मां रमा शर्मा गृहिणी हैं, कहा जाता है कि कुमार पढाई में बचपन से ही मेधावी रहे हैं, हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में उनकी खास रुचि थी, लेकिन उनके पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि इंजिनियर बनने के बाद कमाई अच्छी होगी।

इंजिनियरिंग छोड़ भागे
कुमार विश्वास ने इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला भी ले लिया था, लेकिन उन्होने पढाई बीच में ही छोड़ दी, फिर उन्होने ग्रेजुएशऩ किया, इसके बाद साल 1994 में राजस्थान के एक कॉलेज में लेक्चरर के रुप में करियर की शुरुआत की, इसके साथ ही वो कविता पढने के लिये मंच पर चढ गये, शुरुआती दिनों में कुमार विश्वास जब देर रात कवि सम्मेलनों से लौटते थे, तो ट्रक में लिफ्ट लेकर घर पहुंचते थे, क्योंकि रात के समय बसें बंद हो जाया करती थी।

अंतरजातीय विवाह
कुमार विश्वास ने प्रोफेसर मंजू विश्वास से शादी की है, हालांकि जब दोनों ने प्रेम विवाह किया था तो दोनों के घर वालों ने इसका विरोध किया था, क्योंकि दोनों की जाति अलग है, कुमार विश्वास को करीब दो साल अपने घर में एंट्री नहीं मिली, फिर बड़े भाई और बहन ने माता-पिता को मनाया, जिसके बाद उन्हें पत्नी के साथ घर में एंट्री मिली, कुमार और मंजू की दो बेटियां हैं।

राजनीति में आने का फैसला
रॉकस्टार कवि साल 2011 में अन्ना आंदोलन में मंच संचालन करते थे, फिर जब अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में आने का फैसला लिया, तो कुमार विश्वास भी राजनीति में आये, हालांकि उन्होने चुनाव ना लड़ने की बात कही, फिर 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होने राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा, लेकिन जमानत जब्त हो गई, इसके बाद केजरीवाल से मतभेद के बाद अपनी ही पार्टी में हाशिये पर पड़े हुए हैं, लेकिन कुमार की लोकप्रियता जबरदस्त है, खास कर युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है।

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