नागरिकता बिल पर क्लियर है जदयू का स्टैंड, पीके ने कसा तंज, तो नीतीश ने दिखा दी ‘औकात’

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जदयू के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता पवन वर्मा ने भी इस बिल को एकता और सद्भाव के लिये खतरा बताया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के भीतर से ही इस मुद्दे पर विरोधाभास दिखने लगी है, जदयू राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने फिर से एक बार निराशा जाहिर करते हुए कहा कि नागरिकता बिल का समर्थन करते हुए जदयू के नेतृत्व को ये याद रखना चाहिये कि साल 2015 में लोगों ने जो दोबारा विश्वास और भरोसा दिया था, उसे हमें भूलना नहीं चाहिये।

पवन वर्मा ने भी उठाये सवाल
इसके साथ जदयू के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता पवन वर्मा ने भी इस बिल को एकता और सद्भाव के लिये खतरा बताया है, जदयू एमएलसी गुलाम गौस और गुलाम रसूल बलियावी ने भी इसके खिलाफ प्रमुखता से आवाज उठाई है, लेकिन विरोध का स्वर जदयू केन्द्रीय नेतृत्व को नागवार गुजर रही है, वो इस मुद्दे पर मोदी सरकार के साथ दिख रही है।

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पार्टी लाइन से हटकर बोलने वालों के बयान निजी
बिहार जदयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी लाइन से अलग हटकर बोलने वालों के बयान निजी हो सकते हैं, पार्टी को इससे कोई लेना-देना नहीं है, उन्होने ऐसे नेताओं के बारे में कहा कि पार्टी के निर्णयों पर सवाल उठाने से पहले उन्हें पार्टी के फोरम में गंभीर मुद्दों पर चर्चा करनी होती है, वहां पर ही वो अपनी बात रखें, इससे अलग कोई भी बयान देने से बचे।

पार्टी का स्टैंड साफ
जदयू बिहार अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी का स्टैंड साफ है, हमें कहीं कोई संदेह नहीं है, लोकसभा की तरह ही राज्यसभा में भी हम इस बिल का समर्थन करेंगे, जब पार्टी का लाइन तय है, तो फिर किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति के अलग स्टैंड का कोई मतलब नहीं है, अधिकृत राय वही है, जो लोकसभा में राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने रखा है।

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