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लोजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद से ही चिराग पासवान बिहार की कमान अपने किसी पसंदीदा शख्स को देना चाहते थे।

लोजपा बिहार प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के बाद से ही पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान के बीच खाई बन गई थी, रामविलास पासवान के निधन के बाद चिराग की इच्छा के खिलाफ सीएम नीतीश कुमार के पक्ष में बयान देकर पारस ने इस खाई को और चौड़ा कर दिया, तब चिराग की नाराजदी की वजह से उन्होने अपना बयान तो बदल लिया, लेकिन अपमान की चिंगारी सुलगने लगी, जो अब ज्वाला बन चुकी है।

चाचा से किनारा
लोजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद से ही चिराग पासवान बिहार की कमान अपने किसी पसंदीदा शख्स को देना चाहते थे, वो पशुपति पारस को इस पद से किनारे करने में लगे हुए थे, लेकिन रामविलास पासवान की इच्छा के खिलाफ वो काम नहीं कर पा रहे थे। लेकिन दूसरे चाचा रामचंद्र पासवान की मौत के बाद उन्हें मौका मिल गया, पारस को दलित सेना का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर अपने पिता को सहमत करा लिये।

सीएम नीतीश की तारीफ
रामविलास पासवान की मौत के बाद मीडिया के सामने पारस ने सीएम नीतीश कुमार की तारीफ कर दी, जिससे चिराग की नाराजगी और बढ गई, तब उन्होने प्रिंस राज को भेजकर अपने चाचा पशुपति कुमार पारस को श्रीकृष्णपुरी आवास पर बुलाया, अभी रामविलास पासवान का श्राद्ध कर्म भी नहीं हुआ था, लिहाजा चिराग ने उन्हें बयान बदलने को कहा।

बयान से पलट गये
पशुपति कुमार पारस ने मीडिया को बुलाया और अपने बयान से पलट गये, तब से ही वो अपमानित महसूस कर रहे थे, लेकिन इस बीच प्रिंस राज चिराग के साथ थे, वो दोनों के बीच सेतु का काम कर रहे थे लेकिन धीरे-धीरे प्रिंस के काम से भी चिराग नाराज हो गये, उन्होने विधायक दल के नेता राजू तिवारी को तब सारे काम सौंप दिये, अब बचा-खुचा एकमात्र सांसद सहयोगी भी उनके विरोधी खेमे में चला गया, यही वजह है कि चिराग अपनी ही पार्टी में किनारे हो गये।

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