कभी नड्डा की टीम में थे अमित शाह, अब उनके बाद संभाली बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी

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अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी पूरे देश की सभी राजनीतिक दलों से इसलिये भी अलग दिखाई पड़ती है, क्योंकि इस पार्टी में ना जात-पात होता है, और ना ही वंशवाद चलता है।

जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी मुख्यालय जाकर उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी, दोनों नेताओं ने बीजेपी मुख्यालय से कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया, अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को हौसला बढाते हुए कहा कि बीजेपी ने फिर बार फिर अपनी परंपरा का नेतृत्व करते हुए एक सामान्य कार्यकर्ता से राजनीति की शुरुआत करने वाले को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है।

शाह के खासमखास
जे पी नड्डा को अमित शाह और पीएम मोदी का करीबी कहा जाता है, साल 1991 में नड्डा को बीजेपी युवा मोर्चा की कमान मिली थी, तब अमित शाह युवा मोर्चा के कोषाध्यक्ष थे, कहा जाता है, कि तब से ही दोनों के बीच अच्छी दोस्ती है, जो आज तक कायम है।

बीजेपी सबसे अलग
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी पूरे देश की सभी राजनीतिक दलों से इसलिये भी अलग दिखाई पड़ती है, क्योंकि इस पार्टी में ना जात-पात होता है, और ना ही वंशवाद चलता है। अमित शाह ने विरोधी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि कई अन्य पार्टियां अपना लोकतांत्रिक स्वरुप खो चुकी है, इनमें अपने घर वालों को ही अध्यक्ष और मुख्यमंत्री बनाने की होड़ मची रहती है, केवल भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जो परिवारवाद पर नहीं चलती।

पीएम ने क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि बीजेपी देश की जनता के अनुरुप अपने आपको ढाला, पार्टी ने अपने विस्तार के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के विस्तार का भी ख्याल रखा, इसी वजह से बीजेपी को नई पीढी का सहयोग मिलता जा रहा है, मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि ये मेरी खुशकिस्मती है, कि आपके अंडर मुझे कभी प्रदेश स्तर पर तो कभी राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका मिला।

लकीर खत्म नहीं होने देंगे
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे निवर्तमान अध्यक्ष अमित शाह की उपलब्धियों को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, 2014 में अध्यक्ष राजनाथ सिंह थे, आमतौर पर हमारी पार्टी का भरोसा संघर्ष और संगठन पर है, इसी को लेकर हम आगे बढते रहे हैं, राजनीतिक दल के लिये सत्ता में रहते हुए दल को चलाना एक बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि राजनीतिक दल सरकार का हिस्सा दिखने लगता है, हम सरकार और दल के बीच के लकीर को खत्म नहीं होने देंगे।

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