69 वर्षीय नारायण राणे ने शिवसेना में एक शाखा प्रमुख के रुप में अपना राजनीतिक जीवन शुरु किया था, साल 1999 में पहली बार शिवसेना-बीजेपी सरकार में 8 महीने के लिये महाराष्ट्र के सीएम भी बने।

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किये गये केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे को मंगलवार रात जमानत मिल गई, केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राणे की टिप्पणी को लेकर महाराष्ट्र में उनके खिलाफ 4 एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें रत्नागिरी पुलिस ने मंगलवार दोपहर बाद गिरफ्तार किया था, फिर उन्हें महाड ले जाया गया। आइये आपको बताते हैं कि आखिर राणे और ठाकरे के बीच इतनी कड़वाहट क्यों है और मौजूदा स्थिति का आगामी चुनाव पर क्या असर पड़ेगा।

शिवसेना से नाता
69 वर्षीय नारायण राणे ने शिवसेना में एक शाखा प्रमुख के रुप में अपना राजनीतिक जीवन शुरु किया था, साल 1999 में पहली बार शिवसेना-बीजेपी सरकार में 8 महीने के लिये महाराष्ट्र के सीएम भी बने,  इसी दौरान शिवसेना ने मनोहर जोशी को सीएम बना दिया, साल 2003 में जब शिवसेना ने महाबलेश्वर सम्मेलन में उद्धव ठाकरे को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के रुप में नामित किया, तो नारायण राणे ने इस कदम का विरोध किया, उद्धव के नेतृत्व को चुनौती दी। इसके बाद 2005 में नारायण राणे पर पार्टी में पद और टिकटों को बेचने के आरोप लगने के बाद उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिये बाला साहेब ठाकरे ने पार्टी से निष्कासित कर दिया।

कांग्रेस में शामिल हो गये
इसके तुरंत बाद राणे दर्जनों विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गये, हालांकि करीब 40 विधायकों को अपने साथ लेकर शिवसेना को विभाजित करने के उनके प्रयास को शिवसेना ने विफल कर दिया, 2017 में राणे ने ये कहते हुए कांग्रेस छोड़ दी, कि पार्टी में कोई गुंजाइश नहीं है, narayan rane और उन्होने अपना खुद का संगठन महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष बनाया, बाद में उन्होने बीजेपी को समर्थन की घोषणा की, और राज्यसभा के लिये चुने गये, 2019 में अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर लिया। राणे को शिवसेना पर खासकर ठाकरे परिवार पर तीखे हमले के लिये जाना जाता है, उन्होने शिवसेना संरक्षक बाला साहेब ठाकरे की आलोचना नहीं की, लेकिन उद्धव के खिलाफ लगातार बोलते रहते हैं, इतने सालों में उन्होने उद्धव की पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य पर भी कटाक्ष किया।

क्या कहा था
नारायण राणे ने दावा किया था कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में सीएम उद्धव ठाकरे ये भूल गये कि देश की आजादी को कितने साल हुए हैं, केन्द्रीय मंत्री ने रायगढ जिले में सोमवार को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान कहा, ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि आजादी को कितने साल हो गये हैं, भाषण के दौरान वो पीछे मुड़कर इस बारे में पूछते नजर आये थे, अगर मैं वहां होता तो एक जोरदार थप्पड़ मारता।

Read Also – जेल से रिहा होते ही गरजे अर्णब गोस्वामी, उद्धव ठाकरे को ललकारा, वीडियो हो रहा वायरल!