Friday, April 23, 2021

नीतीश के ‘चुप्पा वोटर’ फिर बदलेंगे खेल?, 2015 में फेल हो चुका है एग्जिट पोल!

सुशासन तथा जंगलराज खत्म करने के वादे को लेकर नीतीश कुमार साल 2005 में सत्ता में आये, तब से ही उनका सोशल इंजीनियरिंग काफी चर्चा में रहा।

बिहार में 2015 विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स के अनुमान जनता के मूड भांपने में नाकाम रहे थे, उस साल बीजेपी ने जदयू को छोड़कर दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, जबकि नीतीश कुमार लालू यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में थे, पोल्स के मुताबिक बीजेपी सत्ता के करीब थी, लेकिन हुआ उल्टा, परिणाम में महागठबंधन को जबदस्त सफलता मिली, बीजेपी सिर्फ 53 सीटों पर सिमट गई।

2005 में सत्ता में आये
सुशासन तथा जंगलराज खत्म करने के वादे को लेकर नीतीश कुमार साल 2005 में सत्ता में आये, तब से ही उनका सोशल इंजीनियरिंग काफी चर्चा में रहा, उसके बाद के तीन चुनाव में जनता ने उनका साथ नहीं छोड़ा, हालांकि उसके बाद बीजेपी से नीतीश के संबंध खऱाब हुए, तो जदयू लालू यादव की पार्टी के साथ गठबंधन में आ गई, लेकिन सत्ता में बनी रही।

2015 परिणाम
2015 में 5 चरणों में बिहार में चुनाव हुए थे, 8 नवंबर को चुनाव परिणाम घोषित किये गये, इसमें बड़ी कामयाबी पाते हुए राजद ने 101 सीटों पर चुनाव लड़कर 80 सीटों पर जीत हासिल की, साथ ही 18.8 फीसदी वोट शेयर रहा, यानी लालू की पार्टी सबसे बड़ी बनकर उभरी, नीतीश की पार्टी ने 101 में से 71 सीटों पर जीत हासिल की, और वोट शेयर 17.3 फीसदी रहा, कांग्रेस ने भी इस बार दूसरे चुनावों से काफी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 27 सीटें हासिल की, ये साल 2010 के चुनावों से उपजी शर्म को काफी हद तक खत्म करने वाला रहा, जिसमें कांग्रेस को सिर्फ 4 सीटें मिली थी।

बीजेपी सिमट गई थी
दूसरी ओर एनडीए की अगुवाई कर रही बीजेपी को सिर्फ 53 सीट मिली थी, साथ ही लोजपा और रालोसपा का भी प्रदर्शन खराब रहा, ये नतीजे एग्जिट पोल से पूरी तरह से विपरीत थे, पोल्स के मुताबिक एनडीए बहुमत के करीब आने वाले थी, यहां तक कि पार्टी ऑफिस में लड्डू तैयार हो चुके थे, काउंटिंग से पहले ही पटाखे फूटने लगे थे, लेकिन नतीजे आये, तो एग्जिट पोल गलत निकले।

Related Articles

- Advertisement -spot_img

Latest Articles