फ्लाइट में हुई थी अमर सिंह-मुलायम सिंह यादव की पहली मुलाकात, ऐसे बने थे सपा के सूत्रधार

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फ्लाइट में मुलाकात के बाद अमर सिंह को मुलायम सिंह यादव ने अपनी पार्टी सपा में राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बैठा दिया, कहा जाता है कि महज 4 साल में ही अमर सिंह का कद सपा में दो नंबर का हो गया था।

किसी जमाने में यूपी की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमर सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे, 64 साल की उम्र में सिंगापुर के एक अस्पताल में उन्होने आखिरी सांस ली, अमर सिंह भले आज हमारे बीच ना हों, लेकिन उनकी राजनीति के नीति-निर्धारण को जनता और नेता दोनों लंबे समय तक याद रखेंगे, सपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंचने वाले अमर सिंह के कई दलों में अच्छे संबंध थे।

दोस्ती के लिये मशहूर
अमर सिंह देश के नामचीन उद्योगपतियों में गिने जाते थे, इसके साथ ही अपनी दोस्ती के लिये भी जाने जाते थे, बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर अंबानी तक उनके बेहद अच्छे संबंध थे, हालांकि कम ही लोग जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव से अमर सिंह की पहली मुलाकात उस समय हुई थी, जब मुलायम रक्षा मंत्री थे, साल 1996 में जिस फ्लाउट में मुलायम सिंह यादव सफर कर रहे थे, उसी जहाज में अमर भी सवार थे, दोनों की मुलाकात हुई, हालांकि ये मुलाकात अनौपचारिक थी, लेकिन इसके बाद दोनों की नजदीकियां बढने लगी।

4 साल की दोस्ती और पार्टी में बड़ा पद
फ्लाइट में मुलाकात के बाद अमर सिंह को मुलायम सिंह यादव ने अपनी पार्टी सपा में राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बैठा दिया, कहा जाता है कि महज 4 साल में ही अमर सिंह का कद सपा में दो नंबर का हो गया था, वो टिकट बंटवारे से लेकर फंड जमा करने तक में बड़ी भूमिका निभाते थे। अमर सिंह ने एक क्षेत्रीय पार्टी का स्तर बढाकर कई फिल्मी सितारों को इस पार्टी से जोड़ा, जया बच्चन को वहीं इस पार्टी में लेकर आये थे।

न्यूक्लियर डील
अमर सिंह ने सपा को दिल्ली की राजनीति में भी स्थापित करने की कोशिश की, 2004 में जब तत्कालीन यूपीए सरकार बैकफुट पर आई, तो इसकी वजह मुलायम नहीं बल्कि अमर सिंह थे, कुछ राजनीतिक विश्लेषक तो कहते हैं कि यूपीए कार्यकाल के दौरान जब-जब कांग्रेस को संकट का एहसास हुआ, तो सपा से मदद मांगी गई, न्यूक्लियर डील के समय कैश फॉर वोट जैसे मामलों में अमर सिंह का नाम आया, उन्होने सरकार बचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

अपनी पार्टी बना ली
साल 2010 में आजम खान और रामगोपाल यादव से मतभेद के बाद अमर सिंह को सपा से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद उन्होने राष्ट्रीय लोकमंच नाम से एक राजनीतिक पार्टी का गठन दिया, amar singh उन्होने अलग पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर पद यात्रा भी किया, लोकमंच ने रैली और सभाएं की, लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं हुआ, जिसके बाद वो दोबारा फिर सपा में आये, लेकिन फिर उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

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