गोल्ड मेडलिस्ट इंजीनियर, फिर IPS, IAS होते हुए सीएम तक, राहुल गांधी की वजह से अजित जोगी ने छोड़ी थी कांग्रेस

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अजित जोगी छत्तीसगढ के पहले मुख्यमंत्री थे, हालांकि एक विवाद की वजह से साल 2016 में जोगी ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया, जोगी के कांग्रेस छोड़ने के पीछे कोई रणनीति नहीं थी, बल्कि तत्कालीन पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी थे।

अजित जोगी इस दुनिया से विदा हो चुके हैं, 74 साल की उम्र में रायपुर के एक अस्पताल में उन्होने आखिरी सांस ली, जोगी ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल हासिल किया था, इसके बाद आईपीएस बनें, फिर दो साल बाद आईएएस, लंबे समय तक कलेक्टर जैसे दबदबे वाले पद पर रहने के बाद उन्होने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया, फिर राजनीति में आने का फैसला लिया, गंभीर दुर्घटना की वजह से दोनों पैरों से लाचार होने के बाद जोगी जीवटता के साथ राजनीति के मैदान में डटे रहे। जोगी के जीवन पर लिखी गई किताब अजित जोगी- अनकही कहानी में कई अहम बातों का जिक्र किया गया है, इस किताब को उनकी पत्नी डॉ. रेणु जोगी ने लिखा है, नेत्र चिकित्सक से विधायक तक का सफर तय करने वाली रेणु जोगी ने बताया था कि अपनी शादी के 40 साल के उतार-चढाव के सफर को उन्होने इस किताब में समाहित करने का प्रयास किया है। इस किताब में झीरम घाटी नरसंहार, जग्गी हत्याकांड, जर्सी गाय प्रकरण, जूदेव प्रकरण, जाति प्रकरण और जकांछ स्थापना का भी जिक्र है।

कांग्रेस से बागी होने के पीछे किसका हाथ
अजित जोगी छत्तीसगढ के पहले मुख्यमंत्री थे, हालांकि एक विवाद की वजह से साल 2016 में जोगी ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया, जोगी के कांग्रेस छोड़ने के पीछे कोई रणनीति नहीं थी, बल्कि तत्कालीन पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी थे। राहुल ने उन्हें उस समय झिड़की लगाई, जब वो राज्यसभा का टिकट मांगने 25 मई 2016 को उनके पास दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन राहुल ने उन्होने तवज्जो देने के बजाय बेरुखी दिखाई, जोगी ने 27 मई को फिर राहुल गांधी से फोन पर बात की, उसमें भी राहुल ने दो टूक शब्दों में कह गया कि राज्यसभा टिकट नहीं मिलेगा, राहुल के करीबियों की मानें तो जोगी ने नाटकीय अंदाज में कांग्रेस उपाध्यक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।

यूं हुई थी फोन पर बातचीत
राहुल गांधी- नहीं मिलेगा राज्यसभा का टिकट
अजित जोगी- ऐसे में पार्टी में काम कर पाना मुश्किल होगा…
राहुल- आप तय कर लो
दिग्विजय सिंह – जो प्रत्याशी का सौदा करोड़ों रुपये में कर दे, उसका पार्टी छोड़कर जाना ही अच्छा

मैंने भी कच्ची गोली नहीं खेली
कांग्रेस छोड़ते समय अजित जोगी ने खुला ऐलान किया था, उन्होने कहा था कि मैंने भी कच्ची गोली नहीं खेली है, मेरी गोली पक गई है, बीस साल प्रशासनिक सेवा में रहा, उसके बाद 30-35 साल से राजनीति में हूं, अकेले ही छत्तीसगढ में बहुमत ला सकता हूं। जोगी के कांग्रेस छोड़ने पर तत्कालीन छत्तीसगढ कांग्रेस अध्यक्ष (वर्तमान में सीएम) भूपेश बघेल ने कहा था कि अंतागढ टेपकांड के बाद अजित जोगी और उनके बेटे अमित जोगी बेनकाब हो चुके हैं, उन्होने पार्टी का टिकट बेचा था, अगर वो नई पार्टी बनाते हैं, तो कांग्रेस को फायदा होगा, क्योंकि उनकी पार्टी रमन की बी टीम होगी।

हां मैं सपनों का सौदागर हूं
जब बाजपेयी सरकार ने एमपी से अलग करके छत्तीसगढ को राज्य का दर्जा दिया, तो अजित जोगी वहां के पहले मुख्यमंत्री बनें, उस समय उनका एक बयान बेहद चर्चित हुआ था, उन्होने कहा था कि हां मैं सपनों का सौदागर हूं, और सपने बेचता हूं। 2018 छत्तीसगढ विधानसभा चुनाव से पहले अजित जोगी ने जरुरत पड़ने पर बीजेपी से समर्थन लेने या देने पर कहा था कि परिस्थिति आने पर सोचा जाएगा, हालांकि बाद में वो अपने बयान से पलट गये, उन्होने कहा कि सूली पर चढना पसंद करुंगा, लेकिन बीजेपी के साथ नहीं जाऊंगा, माना जाता है कि मायावती के दखल के बाद उन्होने अपने स्टैंड से यू-टर्न लिया था, छत्तीसगढ विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी जनता कांग्रेस बसपा के साथ गठबंधन में लड़ी थी।