नये सर्कुलर के मुताबिक अब रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।

तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अरविंद केजरीवाल सरकार बनाने से पहले ही अपने एक फैसले पर विवादों में घिरते दिख रहे हैं, केजरीवाल के शपथ ग्रहण समारोह में शिक्षकों के शामिल होने के मसले को लेकर दिल्ली की भावी सरकार बैकफुट पर आ गई है, दरअसल अब सरकार ने शिक्षकों के अनिवार्य उपस्थिति को निमंत्रण में बदल दिया है।

अब नहीं लगेगी शिक्षकों की हाजिरी
नये सर्कुलर के मुताबिक अब रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है, सरकार के नये फैसले में साफ कहा गया है कि अब मैदान में शिक्षकों की एंट्री के दौरान उनकी हाजिरी नहीं लगाई जाएगी, इस कार्यक्रम में शिक्षकों का शामिल होना स्वैच्छिक है, मालूम हो कि सरकार ने बीजेपी के कड़े विरोध के बाद ये नया आदेश जारी किया है।

पहले था ये आदेश
मालूम हो कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने पहले रामलीला मैदान में 16 फरवरी को होने वाले केजरीवाल शपथ ग्रहण समारोह के लिये शिक्षकों और स्कूल के प्रिंसिपलों को निमंत्रण दिया था, सर्कुलर में कहा गया था कि सभी शिक्षकों की हाजिरी लगाई जाएगी, सभी लोग 20 अन्य लोगों को लेकर पहुंचे।

बीजेपी ने बताया तानाशाही
सरकार के इस फैसले का बीजेपी ने जमकर विरोध किया, दिल्ली की पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता ने इस सर्कुलर को तानाशाही कहा था, उन्होने कहा था कि इससे उनका ये विश्वास चकनाचूर हो गया, कि सत्ता में लौटने के बाद केजरीवाल का जोर शासन और लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने पर होगा, रोहिणी विधायक ने कहा कि इस आदेश की वजह से 15000 शिक्षकों और अधिकारियों को शपथ ग्रहण में शामिल होना होगा।

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