जब विक्रम बत्रा से पाकिस्तानी घुसपैठी ने की थी माधुरी दीक्षित की डिमांड, एके-47 से बरसाईं थीं गोलियां

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1999 में हुए करगिल युद्ध के दौर की कहानियां आज भी हर हिंदुस्तानी के दिल में ताजा है. जिस तरह से पाकिस्तानों ने भारत की जमीन पर कब्जा करने की नापाक कोशिश की थी उसी तरह से हिंदुस्तानी ने पाक को हर कदम पर मुंहतोड़ जवाब दिया था. जिस वक्त करगिल चल रहा था और कोई भी मिशन सफल होता था तो कैप्टन विक्रम बत्रा (captain vikram batra) जोर से कहते थे, ‘ये दिल मांगे मोर’ और फिर शुरू होता था अगला ऑपरेशन. करगिल युद्ध के समय चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं लेकिन विक्रम बत्रा के आगे दुश्मन की एक भी नापाक चाल काम नहीं आई. वह दुश्मनों को चुनौती देने के लिए भी सिर्फ एक बात कहते थे, ‘ये दिल मांगे मोर’.

पाकिस्तानियों ने दी बत्रा को धमकी
करगिल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा ने एक इंटरव्यू दिया था. जिसमें उन्होंने बताया था कि, ‘जब हम और पाकिस्तानी घुसपैठी एक ही फ्रीक्वेंसी पर थे तो उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा था कि, ‘शेरशाह ऊपर मत आना…’ पाकिस्तानियों का इतना कहना था और हिंदुस्तानी सेना के जवानों का खून उबलने लगा. kargil hero vikram batraइस पर तुरंत उन्हें जवाब दिया गया कि, ‘आखिर हमें धमकाने की हिम्मत कैसे हुई, हम उनको ठीक कर देंगे. दुर्गा माता की जय’ कहकर कैप्टन विक्रम अपनी सेना के साथ घुसैपठियों पर बरस पड़े और कुछ ही पलों में 5 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया.

कोड नेम था ‘शेरशाह’
करगिल युद्ध के समय विक्रम बत्रा का कोड नेम शेरशाह रखा गया था. इसी वजह से पाकिस्तानी अपनी हर धमकी में विक्रम बत्रा को शेरशाह पुकारते थे. युद्ध के समय पाकिस्तानी सैनिकों ने उनसे कहा था, “शेरशाह तुम यहां से वापल लौट जाओ वरना यहां से लाशें वापस जाएंगी. kargil hero vikram batra 1इस पर विक्रम बत्रा ने गुस्से में कहा था, “बस 1 घंटे रुको. फिर खुद ही पता चल जाएगा कि आखिर किनकी लाशें यहां से वापस जाती हैं.” इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तानियों को नसीहत देते हुए कहा, ‘फिलहाल तुम हमारी चिंता मत करो, अपनी चिंता करो.’

माधुरी दीक्षित के बदले लड़ाई खत्म
करगिल युद्ध के समय के वैसे तो कई किस्से हमेशा यादों में रहेंगे लेकिन एक किस्सा माधुरी दीक्षित से जुड़ा है. जिसमें कैप्टन विक्रम बत्रा से एक पाकिस्तानी घुसपैठी ने माधुरी दीक्षित (madhuri dixit) की डिमांड करते हुए कहा था कि, ‘हमें माधुरी दीक्षित दे दो, हम नरमदिल हो जाएंगे.’ madhuri-dixit-kargil-war-connectionयानि पाकिस्तानी माधुरी दीक्षित के बदले पीछे हटने को तैयार थे. पर बत्रा ने उसकी बात को सुनकर सिर्फ एक मुस्कान दी और अपनी एके-47 से गोलियां बरसाते हुए बोले, ‘लो माधुरी दीक्षित के प्यार के साथ’ और वहीं कई सैनिक ढेर हो गए.

करना चाहते थे देश का नाम रौशन
विक्रम बत्रा ने करगिल युद्ध का ऐसा नाम रहे हैं जिनकी शहादत की खबर सुन सिर्फ परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे देश को बड़ा झटका लगा था. बताते हैं कि, भारतीय सेना में भर्ती होने से पहले वह मर्चेंट नेवी में चुन लिए गए थे लेकिन उनका मन देश की सेवा करना था. इस बारे में जब उनकी मां ने पूछा था कि, ‘आखिर तुम क्यों मर्चेंट नेवी छोड़ रहे हो?kargil hero vikram batra 3 तो इस पर विक्रम ने बड़ी ही शान से जवाब दिया था कि, ‘मां जीवन में पैसा सबकुछ नहीं होता. मैं जीवन में कुछ ऐसा करना काम करना चाहता हूं जिससे मेरे भारत देश का नाम रौशन हो.’ आखिर हुआ भी वही. विक्रम बत्रा आज हर किसी के जहन में बसते हैं उनकी देशभक्ति नौजवानों को प्रेरित करती है.

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